मानव शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक है गुणकारी सहजन

प्राचीन काल में मानव प्रकृति आधारित खान पान पर निर्भर था। सामान्य सी बात है की प्रकृति का उपयोग सभी लोग समान रूप से करते थे। आयुर्विज्ञान ने उसी समय में अनेक औषधियों के साथ सहजन के रामबाण गुणों के बारें में खोज कर ली थी। जिसकी पुष्टि आज के अनुसन्धानों द्वारा की जाती है। भारत और अन्य देशों में सहजन की खेती बहुत मात्रा होती है।

सहजन एक ऐसा नाम है जिसमें कि सैकड़ों जनों की पीड़ा (दर्द) को हरने अथवा सहने का गुण है। भारत के कई राज्यों मे इसे चाव से खाया जाता है। इसके पत्तों और फलियों की बहुत ही स्वादिस्ट सब्जी बनाई जाती है। दक्षिण भारत में यह बाराहमासी पेड़ होते है। दक्षिण भारत के बहुत से राज्यों में तो बिन सहजन के उनका साम्भर अधूरा सा है। जबकि उत्तर भारत में यह साल में एक बार ही फूलता और फलता है। सहजन के पतियों और फलियों की चटनी काफी उपयोगी है। सहजन का अंग्रेजी नाम ड्रमस्टिक है और वानस्पतिक नाम “मोरिंगा ओलिफेरा” है। इसे अलग – अलग स्थानों में अन्य नामों जैसे कि सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा आदि से भी पहचाना जाता है।

सामान्यतः इसका पेड़ दस मीटर से अधिक ऊँचा होता है और इसकी पत्तियाँ छोटी-छोटी होती है। यह एक प्रकार का बहु-उपयोगी पेड़ है।

हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री ने ‘फिट इंडिया’ के तहत सहजन का नाम लेकर लोगों को इसके औषधिय गुणों के बारें बताया और कहा कि आयुर्वेद विज्ञान इसे अमृत के समान माना जाता है।

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं सहजन के पेड़ के हर भाग में 300 से भी अधिक रोगों के उपचार के रामबाण गुण उपस्थित हैं। इसमें 92 प्रकार के मल्टी विटामिन, 46 प्रकार के एंटी ओक्सिदेंट्स, 36 प्रकार के दर्द निवारक और 18 प्रकार कई एमिनो एसिड्स पाये जाते हैं।

सहजन में विटामिन A, विटामिन C और विटामिन B- कॉम्प्लेक्स,

कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैगनिसियम, बहुआयात मात्रा में पाये जाते है।

सहजन में पौष्टिक तत्वों की चर्चा

सहजन में विटामिन C की मात्रा संतरे से सात गुना अधिक होती है।

सहजन में विटामिन A की मात्रा गाजर से चार गुना अधिक होती है।

सहजन में कैल्शियम की मात्रा दूध से चार गुना अधिक होती है।

सहजन में पोटैशियम की मात्रा केले से तीन गुना अधिक होती है।

सहजन में प्रोटीन की मात्रा दही से तीन गुना अधिक होती है।

सहजन के विभिन्न भागों का रामबाण उपयोग

सहजन के पेड़ के हर भागों में जैसे कि जड़ , तना, छाल, गोंद, पत्ते, फूल, फली, और यहाँ तक की बीज में भी औषधिय गुण विद्यमान है।

छाल

सहजन के छाल में शहद मिलाकर उपयोग करने से कफ, वात जैसे बीमारी से छुटकारा मिलता है। छाल से बने हुए काढ़ा पीने से दांतों में कीड़े लगने वाले दर्द से मुक्ति मिलती है। अन्य बीमारी साइटीका, गठिया, और लीवर में भी आरामदायक होता है।

बीज 

इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। बीज को पीसकर इसके चूर्ण को पानी में मिलाने से यह एक प्राकृतिक जल शोधक के रूप में कार्य करता है। और पानी को शुद्ध करके उसे पीने योग्य बनाता है। इसके बीज को घिसकर सुंघने से सर दर्द में आरम मिलता है। फाइबर कि अधिकता के कारण बीज को दवाईयों के रूप में प्रयोग करने से पाचन की समस्या और कब्ज जैसों का समाधान होता है। इसके बीज से तेल निकला जाता है। त्वचा को चमकदार बनाने के लिए इसके बीज का स्क्रब बनाया जाता है।

पत्ती

सहजन के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल कर कुछ बूंदो को कान में डालने से कान के दर्द में आरम मिलता है।

पत्तों का रस, छोटे बच्चों के पेट में कीड़ों को मारने के लिए उन्हे दिया जाता है।

पत्तों का लेप, मोच और गठिया के लिए उपयोगी है।

पत्तों के काढ़े से उदरशूल, नेत्ररोग, उच्च रक्तचाप, घबराहट, दस्त उल्टी, चक्कर आदि समस्याओं में भी आरम मिलता है।

पत्तों के बने फेस मास्क का प्रयोग त्वचा मे निखार के साथ- साथ पिम्पल्स और मुहंसों को ख़त्म करने मे किया जाता है।

पत्तियों का जूस पीने से मोटापे को दूर किया जा सकता है।

फूलों

सहजन के फूलों के रस का सेवन करने से पेट की गैस, पेट में दर्द, अपच और कब्ज की समस्या का निदान होता है।

 

गोंद

सहजन के गोंद का अत्यंत प्रभाविक उपयोग है। पुरुषों में इसके उपयोग से शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि तथा उनकी गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।और महिलाओं में महवारी के दिनों में होने वाले दर्द से निजात देता है। गर्भाशय की कई समस्याओं से भी आरम मिलता है।

फली

सहजन की फली की सब्जी बनाने से पाचन सम्बन्धी समस्या से छुटकारा मिलता है। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कमजोरी, लीवर रोग , उदर रोग सभी में यह एक औषधी के रूप में प्रयोग होता है।मानव के प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

जड़

सहजन की जड़ के छाल रस बने काढ़े में सेंधा नमक और हिंग मिलाकर पीने से पित्ताशय के पथरी से निजात मिलता है।

सहजन की खेती किसी भी प्रकार की भूमि पर किया जा सकता है। इसको ज्यादा देख-रेख की आवश्यकता नही होती है सहजन की खेती से जमीन की उर्वकता क्षमता में वृद्धि होती है। इसका सेवन चारे के रूप में करने से पशुओं का दूध कई गुना अधिक बढ़ जाता है।