जुर्म की दुनिया का पुराना खिलाड़ी है यूपी पुलिस के जवानों का कातिल विकास दूबे, यहाँ पढ़िए पूरी कुंडली

उत्तर प्रदेश में आठ पुलिसकर्मी उस वक्त शहीद हो गये जब वे दबिश देने एक हिस्ट्रीशीटर के घर पहुंचे थे. इस दौरान बदमाशों ने उन पर फायरिंग कर दी, जिसमें आठ पुलिस के जवान शहीद हो गये जबकि कई और जवान घायल हो गये. इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में बवाल मचा हुआ है. हमले का आरोप विकास दुबे नाम का एक व्यक्ति बताया जा रहा है. हालाँकि विकास दूबे का नाम आपने भले ही पहली बार सुना हो लेकिन गुनाह की दुनिया में विकास दूबे काफी चर्चित हैं. विकास दूबे ऐसी औलाद हैं जिसकी माँ कह रही हैं कि मेरे बेटे को मार डालो.

राजनाथ सिंह की सरकार में किया था मर्डर 

विकास दूबे का नाम पहली बार चर्चा में तब आया था जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह थे. राजनाथ सिंह ने संतोष शुक्ला नाम के नेता को दर्जाप्राप्त मंत्री बनाया था. दरअसल बात 1996 की है जब कानुपर की चौबेपुर विधानसभा सीट से हरिकृष्ण श्रीवास्तव और संतोष शुक्ला चुनाव लड़े थे. इस चुनाव में हरिकृष्ण श्रीवास्तव को जीत हासिल हुई थी और संतोष शुक्ला चुनाव हार गये. हालाँकि जब हरिकृष्ण श्रीवास्तव का विजय जुलुस निकला था उसी दौरान हरिकृष्ण श्रीवास्तव और संतोष शुक्ला के बीच विवाद हो गया. इस विवाद में विकास दूबे का नाम भी आया था. विकास दूबे के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था. बस यही से शुरू हो गयी थी विकास दूबे और संतोष शुक्ला की दुश्मनी!

11 नवंबर 2001 को कानपुर के थाना शिवली में संतोष शुक्ला मौजूद थे, जैसे ही संतोष शुक्ला बाहर निकले उन्हें गोलियों से भून दिया गया. उनकी मौत हो गयी. हत्या का आरोप विकास दूबे पर लगा. हालाँकि कई साल तक मुकदमा चलने के बाद आखिरकार सबूतों के अभाव में उसे बरी कर दिया गया. इसके बाद विकास दूबे के गुनाहों की लिस्ट बढ़ती चली गयी. यहाँ तक कि अपने ही चचेरे भाई  पर जानलेवा हमला करवाने का आरोप भी विकास दूबे पर लग चुका है. बताते चलें कि संतोष शुक्ला की हत्या के मामले में तो विकास बच गया लेकिन उसके खिलाफ अभी भी 60 केस दर्ज हैं.

राजनीति पकड़ से बचता आ रहा था विकास दूबे 

कहा जाता है कि विकास दूबे की पकड़ा नेताओं से खूब रही है. बसपा की सरकार हो या फिर सपा की, दोनों ही पार्टी की सरकार में विकास दूबे के हाथ खुले होते थे. विकास दुबे ने जेल में रहते हुए शिवराजपुर से नगर पंचायत का चुनाव भी जीता था. अब इस विकास दूबे ऐसा काण्ड कर दिया है कि सरकार के लिए इसे हजम कर पाना मुश्किल है.

अब विकास दूबे ने योगी सरकार को चैलेंजे दे दिया है. आइये एक बार पूरी घटना को समझते हैं. दरअसल राहुल नाम के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज करवाई है कि विकास उसे रास्ते से जबरन अपनी गाड़ी में डालकर अपने घर ले गया था, जहां उसने मुझे मार पीटकर एक कमरे में बंद कर दिया था. किसी तरह रात में मौक़ा देखकर वो वहां से भाग आया. इसके बाद पुलिस पूरे बंदोबस्त के साथ विकास दूबे के गाँव की तरफ निकल गयी. रास्ते को एक जेसीबी मशीन से बंद कर दिया, इसके बाद पुलिस टीम में शामिल डीएसपी खुद पैदल चलते हुए विकास के घर की तरफ निकल पड़े. इसके बाद विकास के गुर्गों ने तीन तरफ से गोलियों को बौझार कर दी. जिसमें आठ जवान शहीद हो गये.

चारो भाई थाने में हिस्ट्रीशीटर, दर्ज है 60 केस 

ऐसा नही है कि परिवार में सिर्फ विकास दूबे ही क्रिमिनल है बल्कि विकास दूबे के साथ-साथ उसके तीन भाई अतुल दुबे, दीपू दुबे और संजय दुबे भी इसी थाने में हिस्ट्रीशीटर के तौर पर दर्ज हैं. कानपुर में इस मुठभेड़ के बाद विकास दुबे यूपी पुलिस का मोस्ट वॉन्टेड बन गया है, वहीँ विकास की माँ सरला देवी ने कहा, ‘उसे पुलिस की पकड़ में आने से पहले खुद ही सरेंडर कर देना चाहिए. अगर वह सामने नहीं आता है तो पुलिस उसे एनकाउंटर में मार डालेगी.’उन्होंने कहा, ‘मैं कहती हूं कि अगर पुलिस उसे पकड़ लेती है तो उसे मार भी दे क्योंकि उसने बहुत गलत काम किया है.’ विकास के खिलाफ दर्जनों संगीन मामले चल रहे हैं. हत्या और हत्या की कोशिश के कई केस भी इसमें शामिल हैं.