उदयपुर दहशत: कन्हैया लाल ने 13 दिन पहले लगायी थी सुरक्षा की गुहार लेकिन राजस्थान पुलिस ने नहीं मानी

उदयपुर के एक दर्जी कन्हैया लाल ने अपनी हत्या से लगभग 13 दिन पहले राजस्थान पुलिस को पत्र लिखकर कहा था कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है और उनके छोटे बेटे द्वारा पूर्व भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा का समर्थन करने वाले एक फेसबुक पोस्ट के कारण उनके ठिकाने पर नजर रखी जा रही है।

15 जून को पुलिस को दी गई अपनी याचिका में लाल ने कहा था कि एक गेम खेलते समय, उनके छोटे बेटे ने अनजाने में नूपुर शर्मा का समर्थन करते हुए एक सोशल मीडिया संदेश अपलोड कर दिया था।

कन्हैया लाल ने पुलिस से यह भी निवेदन किया था कि उसे पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता है क्योंकि वह अपनी दूकान नहीं खोल पा रहा है और दूसरे संगठनों के कुछ व्यक्तियों द्वारा उसकी हत्या करने के इरादे से उसकी तस्वीरें प्रसारित करने के बाद उसे जान से मारने की धमकी मिली है।

कन्हैया लाल के मुताबिक, दो दिन बाद दो लोग उसकी दूकान पर आए और फोन करने के लिए उसके फोन का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया।

“मैंने कॉल करने के लिए अपना फोन दे दिया। हालांकि, उन्होंने मुझसे सवाल किया कि क्या मैंने सोशल मीडिया पोस्ट को डिलीट करने से पहले शेयर किया था।” अपने आवेदन में, उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि मुझे यह भी नहीं पता कि फोन कैसे चलता है और यह मेरे बच्चे द्वारा गेम खेलते समय पोस्ट किया गया था।”

साथ ही, उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री को फिर से साझा न करने की चेतावनी देकर वे चले गए।

धनमंडी पुलिस थाने ने 11 जून को कन्हैया को फोन करके सूचित किया कि उसके खिलाफ एक रिपोर्ट दर्ज की गई है और उसे जांच में भाग लेना होगा। उसके पड़ोसी नजीम ने उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी, जबकि उसे पता था कि कन्हैया लाल फोन का इस्तेमाल करना भी नहीं जानता।

लाल, जिनकी मंगलवार को दिनदहाड़े दो मुस्लिम व्यक्तियों द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, ने अपने बयान में शिकायत की थी कि “पिछले तीन दिनों से नजीम के साथ पांच से छह लोग मेरी दूकान की रेकी कर रहे हैं और मुझे दुकान नहीं खोलने दे रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “मुझे यह भी पता चला कि मेरी दुकान के पास हर दिन पांच से सात लोग डेरा डाले हुए हैं और मुझे यह भी पता चला कि मेरे दुकान खोलने के बाद वे मुझे मारने की योजना बना रहे हैं।”

उसने यह कहना जारी रखा कि नजीम और उसके चार या पांच साथियों ने अपने इलाके के समूह में उसका नाम और तस्वीर लोकप्रिय कर दी थी और दूसरों पर दबाव बना रहे थे कि अगर उसे कहीं देखे तो उसे मार डालो।

लाल ने अपनी दुकान खोलने की अनुमति मांगी और पुलिस से नजीम और उसके दोस्तों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग भी की थी। साथ ही अपने लिए सुरक्षा भी मांगी थी। लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।

राजसमंद क्षेत्र से लाल की हत्या करने और फिर उसके फुटेज सोशल मीडिया पर साझा करने वाले दो हमलावरों को राजस्थान पुलिस ने हिरासत में लिया है। उदयपुर में प्रशासन ने इंटरनेट बंद कर दिया है और शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है। सरकार ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए और सुरक्षाकर्मी उदयपुर भेजे हैं।