निर्मला सीतारमण को ‘काली नागिन’ कहकर क्या साबित करना चाहते हैं बनर्जी? मचा बवाल

राजनीति में भाषा का स्तर पिछले कुछ सालों से किस कदर गिर गया हैं ये हम सभी देख रहे हैं. कोई किसी को नालायक कहता है तो कोई नपुंसक, कोई किसी को खून का सौदागर कहता है तो कोई रावण! हालाँकि इस तरह के अधिकतर बयानबाजी विपक्ष की तरफ से अधिक होता है लेकिन समझने वाली बात ये है कि आखिरकर विपक्ष इस बात को क्यों नही समझता कि जितनी गाली दी जाती है सत्ता पक्ष उतनी ही मजबूती से खड़ा होता दिखाई दिया है.

ताजा मामला पश्चिम बंगाल से जुड़ा है. यहाँ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ विवादित बयान दिया. उन्होंने वित्त मंत्री सीतारमण की तुलना ‘जहरीले सांप’ से की. कल्याण बनर्जी ने कहा कि जिस तरह लोग कारी नागिन के डसने से मर जाते हैं, उसी तरह लोग सीतारमण की वजह से मर रहे हैं. अब जब मोदी सरकार में वित्त मंत्री को कोई काला नागिन कहेगा तो बीजेपी कहाँ चुप रहने वाली थी.

बीजेपी की तरफ से संबित पात्रा ने मोर्चा संभाला और उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि “टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ‘काला नागिनी’ कहा है, जो निंदनीय है. यह टिप्पणी उस राज्य में की गई है जहां हर घर में देवी काली की पूजा की जाती है. ये टिप्पणी न केवल नस्लवादी है, बल्कि महिला विरोधी भी है.’ दरअसल बंगाल के बांकुडा में शनिवार को टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर अर्थवयवस्था को ध्वस्त करने का आरोप लगाया. इसी दौरान उन्होंने निर्मला सीतारमण को काला नागिन कह दिया. इसी के साथ इन्होने ये भी कहा उसने अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया है. उसे शर्म आनी चाहिए और अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. वह सबसे खराब वित्त मंत्री है.’

इसी के साथ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमी अध्यक्ष ममता बनर्जी का अपने नेताओं पर नियत्रंण नहीं रहा है. उन्होंने कहा, ‘TMC में भ्रष्टाचार शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक फैल गया है. वे लोग अंदरूनी झगड़े में उलझे हुए हैं और उनमें से कई सत्तारूढ़ दल में बने हालात से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. घोष ने कहा, ‘ हम ऐसी टिप्पणियों को अधिक महत्व नहीं देते हैं, वे हताश होकर ऐसी बेतुकी बातें कर रहे हैं.’ 

हालाँकि इसमें कोई दो राय नही है कि साल 2014 चुनाव वक्त प्रधानमंत्री मोदी को भी कुछ अपशब्द कहे गये थे. इसका प्रधानमंत्री मोदी ने उस वक्त बड़ा मुद्दा बनाया था. इसके बाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त भी प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी नेताओं को खूब अपशब्द और गालियाँ दी गयी थी. इसका भी प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ा मुद्दा बनाया था. जिसका फायदा भी हुआ था.
विपक्ष को इस बात को समझ लेना चाहिए कि अपशब्द का इस्तेमाल करना उनके लिए घातक साबित होता है ऐसे में विरोध अपनी जगह है और विरोध के दौरान उपयोग किये गये शब्दों के अपने मायने होते हैं. ऐसा कुछ नही करना चाहिए विरोध में बोले गये शब्द उलटा न पड़ जाए