उपद्रव होने तक एसीपी अनवरगंज के संपर्क में था कानपुर उपद्रव का मास्टरमाइंड हयात जफर, एसआइटी को जांच में मिले चौंकाने वाले तथ्य

कानपुर हिंसा को लेकर एक बड़ी सनसनीखेज खबर सामने आयी है। जागरण की एक एक रिपोर्ट अनुसार कानपुर की नई सड़क पर हुआ उपद्रव अचानक प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं था। बल्कि इसकी पटकथा एक हफ्ते से लिखी जा रही थी। पूरे शहर को हिंसा की आग में झुलसाने का इंतजाम हो रहा था तो दूसरी ओर बेकनगंज थाना प्रभारी नवाब अहमद और एसीपी अनवरगंज अकमल खां की भूमिका भी इसमें बताई जा रही है। उपद्रव की शुरुआती जांच में एसआईटी को चौंकाने वाली जानकारियां हाथ लगी हैं।
आरोपितों के मोबाइल फोन की सीडीआर (काल डिटेल रिपोर्ट) से एसआईटी को जानकारी मिली कि उपद्रव की शुरुआत होने तक हयात जफर हाशमी एसीपी अनवरगंज के संपर्क में था। बावजूद इसके मामले में अब तक कोई कार्रवाई न होना भी चौंकाने वाला है।

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा ने विवादास्पद बयान 26 मई को दिया और 27 मई को एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी ने थाने जाकर एक शिकायती पत्र दिया, जिसमें कहा गया कि नूपुर शर्मा ने गलत बयानबाजी की है और इसके खिलाफ वह लोग तीन जून को बाजार बंद और पांच जून को जेल भरो आंदोलन करने जा रहे हैं।
उसके बाद संगठन के पदाधिकारियों ने बाकायदा प्रेस कान्फ्रेंस की और दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों में अभूतपूर्व बाजार बंदी के प्रयास हो रहे हैं। बाजार बंदी की तैयारी के बीच स्थानीय खुफिया इकाई ने पुलिस अधिकारियों और थाना पुलिस को रिपोर्ट भेजकर आशंका जताई थी कि बाजार बंदी के बहाने शहर में हिंसा हो सकती है।बावजूद इसके, बेकनगंज पुलिस ने उसे संज्ञान में नहीं लिया गया। कोई निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की जिससे बाजार बंदी का आवाहन करने वालों को रोका जा सकता।
थाने की जीडी पर इस मामले में कोई सूचना अंकित नहीं है। थाना प्रभारी ने एसीपी को छोड़कर प्रकरण से किसी को भी सूचित नहीं किया और न किसी प्रकार का पत्राचार किया। बाजार बंदी की संभावनाओं को देखते हुए अतिरिक्त फोर्स की मांग भी नहीं की। एसीपी अनवरगंज की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है क्योंकि उन्हें भी बाजार बंदी के बारे में जानकारी थी, लेकिन उनके द्वारा भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पुलिस ने जो मुकदमा दर्ज किया है उसमें सरकारी संपत्ति का नुकसान होने की बात दर्ज की गई है, जबकि पुलिस के पास ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिसमें साबित किया जा सके कि सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है। हालांकि पथराव में थाना पुलिस की जीप का शीशा टूटा था। जीप की न तो फोटोग्राफी कराई और ना कोई फारेंसिक जांच। बल्कि, जीप के टूटे शीशे को बदलवा लिया गया। बेकनगंज पुलिस ने साक्ष्य संकलन में भी लापरवाही दिखाई। सूत्रों का दावा है कि बेकनगंज पुलिस ने उपद्रव के बाद केवल एक बोरा पत्थरों की बरामदगी दर्शाई है।

एसआइटी उपद्रव के मामले में इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि क्या जो कुछ हुआ उसके पीछे बड़ी साजिश थी। असल में जिस दिन बवाल हुआ उस दिन राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे। एसआइटी को शुरुआती जानकारी मिली है कि उपद्रवियों की मंशा थी कि वीवीआइपी के शहर में रहते उपद्रव होगा तो खबर वैश्विक स्तर तक जाएगी। उसके बाद मुद्दे को भुनाना आसान होगा और वही हुआ। साजिशकर्ताओं की योजना शहर को दंगे की आग में झोंकने की थी।

इस मामले में संयुक्त पुलिस आयुक्त आनन्द प्रकाश तिवारी ने बताया कि एसआइटी जांच कर रही है। पुलिस की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट मिलने पर जल्द ही कार्रवाई होगी। (साभार जागरण)