बिहार में डबल इंजन की सरकार कोरोना में फेल? ये खबर आपको डरने पर मजबूर कर देगी

पूरा विश्व इस वक्त कोरोना वायरस के कहर से जूझ रहा है. भारत में कोरोना के मामले 13 लाख के करीब पहुँच गये है. तीस हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. भारत के कई राज्यों में कोरोना से लड़ने के लिए जी जान लगा दी गयी है लेकिन बिहार जहाँ डबल इंजन वाली सरकार चल रही है वहां की स्थिति बेहद दयनीय हो गयी है. आलम ये है कि कोरोना के कारण मृत लोगों के शरीर के साथ भी ऐसा व्यवहार किया जा रहा है कि आप भी आगबबूला हो जाएँ.

बिना जाँच के युवक को कोरोना संक्रमित बताकर कर दिया भर्ती 

सबसे पहले बात बिहार के अररिया के करते हैं जहाँ कोरोना मरीजों के साथ घोर लापरवाही बरती जा रही है. दरअसल एक युवक को जब खांसी और बुखार का समाना करना पड़ा तो जांच करवाने के लिए गया. अस्पताल में पहुँचने के बाद कई घंटों खड़े रहने के बाद जब उसका नंबर आया तो बताया कि टेस्ट किट खत्म हो गयी है. इसके बाद युवक कई घंटों इन्तजार करता रहा. बाद वो वो जाँच के लिए फॉर्म भरकर घर वापस आ गया. इसके बाद अचानक उसके पास कॉल आती है कि आपका रिपोर्ट पॉजिटिव आ गया है. आपको लेने के लिए गाड़ी जा रही है. युवक बोलता रहा है कि उसका तो सैम्पल तक लिया नही गया तो आखिर मेरी रिपोर्ट कैसी आ सकती है. उसकी एक ना सुनी गयी. उसे लाकर कोरोना अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया. अब युवक को डर है कि कहीं कोरोना संक्रमितों के बीच में रहने से उसे भी कोरोना ना हो जाये.

इलाज के लिए भटकती महिला ने आखिरकार तोड़ दिया दम 

वहीँ बिहार के किशनगंज में एक महीला का टेस्ट करवाने के लिए परिवार इधर से उधर भटकता रहा लेकिन किसी ने नही सुनी और अंत में महिला आने दम तोड़ दिया. दरअसल महिला की तबियत खराब होने की वजह से उसे अस्पताल लेकर आया गया. जहाँ डॉक्टरों ने पहले कोरोना जांच की बात कहकर किनारा कर लिया और बिना कोरोना की जांच के इलाज करने से इंकार कर दिया. इसके बाद परिवार कोरोना की जांच के लिए इधर उधर भागता रहा लेकिन पांच घंटे बीत जाने के बाद भी महिला का कोरोना जांच नही सकी, अतं में महिला ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया. जिसके बाद परिवार वालों ने अस्पताल में तोड़ फोड़ की.

अधजली लाश को छोड़कर भाग गये स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी 

वहीँ बिहार के रोहतास में प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है. दरअसल एक कोरोना मरीज की मौत के बाद उसके लाश को अंतिम सस्कार के लिए शमसान तक लेकर आये. लेकिन लाश को जलाने में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी इतने जल्दी में थे कि लाश को आग के हवाले कर टीम वापस चली गयी. इधर लाश पूरी तरह से जली ही नही. अधजली लाश को कुत्ते नोंचकर खाने लगे, अब इलाके के लोग इस बार से डर गये कि कोरोना संक्रमित की लाश को खाने वाले कुत्ते की वजह से कहीं इलाके में कोरोना ना फैला जाये. वहीँ सिर्फ इतना ही नही जो लोग लाश को लेकर जलाने के लिए आये थे उन्होंने अपनी पीपीई किट वहीँ खुले में छोड़कर भाग गये.

अस्पतालों की हालत खराब, दबाज इंजन सरकार पटरी से उतरी? 

इतना ही नही अस्पतालों में कई दिनों तक लाशें पड़ी रहती है, उन्हें उठाया नही जाता. जांच के लिए लोगों को कई कई दिन तक इन्तजार करना पड़ रहा है. जांच के लिए जब लोग पहुँचते हैं तो 50 लोगों का सैम्पल लेकर कह दिया जाता है “कल आना “. जांच के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हो जाते है अब ये लोगों को ये भी डर लगता है कि इतनी बड़ी संख्या में इकट्ठा होने के बाद कहीं यही किसी से कोरोना का संक्रमण ना फ़ैल जाए.

बिहार में टेस्टिग स्पीड बेहद कम है और संक्रमण फैलता जा रहा है. अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में बिहार की स्थिति खराब हो सकती है. विकास पुरुष नितीश कुमार की सरकार बिहार के लोगों को नरक के दरवाजे पर लेकर जा सकती है. उम्मीद तो यही है कि सरकार जल्द इसपर विचार करेगी और टेस्टिंग में तेजी लाएगी. जेडीयू और बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार यानि की डबल इंजन वाली सरकार बिहार में कोरोना से लड़ने में अक्षम क्यों दिखाई दे रही है ये भी सोचने का विषय है.