भारत के इन दो पड़ोसी देशों में भी है चीन के खिलाफ नाराजगी!

चीन जिस तरह से अपने आसपास के देशों के विस्तारवादी नीति अपना रहा है, उससे एशिया में कई देश परेशान हैं, उसकी गुंडई के चलते उसके और उसको पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते तनावपूर्ण रहते हैं, ऐसे में भारत के साथ उसका विवाद, उसे कमजोर जरूर करेगा।

चीन एक ऐसा देश हैं जिसकी वजह से उसकी सीमा से सटे पड़ोसी देशों में नाराजगी बनी रहती है। उसकी चालबाजियों की वजह से उसके रिश्ते पड़ोसी देशों से अधिक ठीक नहीं रहते हैं। ऐसे में ही म्यांमार और भूटान भी चीन की गुंडागर्दी से परेशान नजर आ रहे हैं। इसकी एक ही वजह है कि चीन यहां भी अपनी विस्तारवादी नीति आजमा रहा है और छोटे व कमज़ोर देशों के सामने दबंगई दिखाने में लगा हुआ है।

Xi jinping Myanmar

म्यांमार और चीन के रिश्तों को आप इसी बात से समझ सकते हैं कि, म्यांमार ने रूसी मीडिया के सामने आधिकारिक तौर पर चीन का नाम लिये बगैर कहा था कि ‘एक विदेशी ताकत’ उसकी ज़मीन पर विद्रोह और आतंक भड़काने के लिए साज़िश कर रही है। अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार इस ताकत का अर्थ चीन ही मान रहे हैं। इसके अलावा भारत जिस तरह पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवाद का सामना कर रहा है ठीक वैसे ही म्यांमार भी चीन से परेशान है। खबरों की मानें तो म्यांमार की सीमाओं पर चीन 23000 की बड़ी आर्मी को हथियार, ट्रेनिंग और वित्तीय सहायता दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि म्यांमार की सीमाओं पर चीन की मदद से जो आतंक फलता फूलता है, वह भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में ULFA और NSCN(K) उग्रवादी संगठनों का मददगार साबित होता है।

म्यांमार के विद्रोही संगठनों को उकसावा देने और उन्हें पनपने के लिए खाद देने के पीछे चीन की रणनीति असल में, बेल्ट और रोड प्रोजेक्टों को लेकर मानी जा रही है। चीन म्यांमार के साथ इकोनॉमिक कॉरिडोर को मज़बूत करना चाहता है। इससे चीन को बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में एक तरह का वर्चस्व मिल सकता है, जो भारत पर दबदबा बनाने में कारगर साबित होगा। दूसरी तरफ, आतंकियों को मदद कर चीन म्यांमार सरकार पर दबाव बनाने के साथ ही, म्यांमार की ज़मीन से दूसरे देशों को दूर रखना चाह रहा है।

Bhutan

ताजा मामलों पर निगाह डालें तो पहले भी म्यांमार ने कई बार चीन पर आरोप लगाए हैं कि वो उसके अंदरूनी मामलों में दखलंदाज़ी कर रहा है। 2016-2017 में रोहिंग्या मुसलमानों के संकट के समय म्यांमार की छवि दुनिया भर में खराब हुई थी। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो तब म्यांमार को चीन पर काफी निर्भर होना पड़ा था। हालांकि इससे पहले भी 1990 के दशक तक भी चीन का दबाव म्यांमार पर काफी बढ़ चुका था। एक तरफ, चीन न केवल म्यांमार में आंतक भड़काने में लगा है, दूसरी तरफ चीन खुद को शरीफ साबित करने के लिए म्यांमार और विद्रोही संगठनों के बीच मध्यस्थता कराने का नाटक भी करता है।

वहीं भूटान और चीन के रिश्तों को देखें तो ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी की हालिया मीटिंग में चीन ने पूर्वी भूटान के ट्रैशियांग ज़िले में एक वन्यजीव अभयारण्य बनाए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह ज़मीन चीन और भूटान के बीच विवादित सीमा पर है। हालांकि भूटान ने चीन के इस बयान को खारिज करते हुए कहा कि चीन के साथ जिन जगहों को लेकर बात चल रही है, यह अभयारण्य उनमें से किसी स्थान पर नहीं बन रहा और यह भूटान का पूरी तरह अंदरूनी और राष्ट्रीय मामला है। चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि चीन और भूटान के बीच सीमाएं कभी परिभाषित नहीं रहीं लेकिन नया विवाद कोई नहीं है। एचटी द्वारा जारी चीन के इस बयान में यह भी कहा गया है कि भूटान और चीन के बीच सीमा विवाद के बीच किसी तीसरे को नहीं आना चाहिए… यह साफ तौर पर भारत को चेतावनी है।

Xi jinping

चीन जिस तरह से अपने आसपास के देशों के विस्तारवादी नीति अपना रहा है, उससे एशिया में कई देश परेशान हैं, उसकी गुंडई के चलते उसके और उसको पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते तनावपूर्ण रहते हैं, ऐसे में भारत के साथ उसका विवाद, उसे कमजोर जरूर करेगा।