बाबरी मस्जिद विध्वंस केस पर फैसला देने वाले जज की व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ाने से SC का इनकार, कही ये बात..

सुप्रीम कोर्ट के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में फैसला देने वाले पूर्व न्यायाधीश को मिली व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ाने से इनकार किया गया। न्यायमूर्ति एस के यादव ने सेवानिवृत्ति के बाद भी अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायमूर्ति आर एस नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने न्यायधीश एस के यादव की व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ाने की मांग को खारिज किया।

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व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ाने
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क्योंकि व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ाने की मांँग

न्यायाधीश ने अपने अंतिम मामले की सुनवाई की गंभीरता को देखते हुए जो कि बाबरी विध्वंस केस था अपनी सुरक्षा का समय बढ़ाने की मांँग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट को अगस्त महीने तक ट्रायल पूरा करने की डेडलाइन देते हुए कहा था कि कोर्ट जल्द से जल्द इस मामले में फैसला सुनाए, जिसके बाद स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बाबरी विध्वंस केस में आखिरी फैसला सुनाने के लिए 30 सितंबर, 2020 को आखिरी तारीख तय की थी और उसी दिन ही फैसला सनाया था। इस केस में उन्होंने सभी आरोपियों को बाइज्ज़त बरी कर दिया था।

उस हाई-प्रोफाइल केस में कुल 49 आरोपियों में से भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेता जैसे एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती थे। दरअसल, एसके यादव पिछले साल 30 सितंबर को ही रिटायर होने वाले थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने होने नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल सीबीआई जज को सुनवाई पूरी होने तक पद पर रहने को कहा था।