जयंती स्पेशल : जीवन को उचित ढंग से जीने की कला सिखाते हैं संत रविदास के ये अनमोल वचन 

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देशभर में आज रविदास जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है, कहीं इस भव्य अवसर पर शोभायात्रा निकाली जा रही हैं तो कहीं उनके भजन सुनकर उन्हे याद किया जा रहा है, बताया जाता है कि संत रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था जिसे हम बनारस के नाम से भी जानते हैं, वहीं ये मान्यताएं भी हैं कि रविवार के दिन वो जन्मे थे इसलिए उनके माता पिता ने उनका नाम रविदास रख दिया था।

समाज सुधारक संत थे रविदास

वो एक आध्यात्मिक गुरु, समाज सुधारक और कवि भी थे उन्होने अपने जीवन काल में बहुत सी कविताएं, दोहो की संरचना की है, जहां उनको पूरा देश आज याद कर रहा है ऐसे में उनको याद करने के साथ – साथ अगर हम उनके जीवन और जीवन जीने के सही तरीकों को लेकर उनके विचार न जान पाएं तो उनको याद करना व्यर्थ ही होगा। मनुष्य अपने विचारों और कर्मों से ही जाना जाता है तो आइए जानते हैं जीने जीने की कला को लेकर क्या है उनके विचार।

ये हैं उनके अनमोल विचार 

  • मन चंगा तो कठौती में गंगा ये उनका सबसे प्रसिद्ध विचार जिसका अर्थ है अगर मन सच्चा है तो घर के पानी में ही गंगा जल मिल जाएगा, इसलिए इंसान को अपना मन हमेशा साफ रखना चाहिए। 

 

  • किसी का भला नहीं कर सकते, तो किसी का बुरा भी मत करना,फूल जो नहीं बन सकते तुम, तो कांटा बनकर भी मत रहना.

 

  • कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा अपने जन्म के कारण नहीं बल्कि अपने कर्म के कारण होता है। व्यक्ति के कर्म ही उसे ऊंचा या नीचा बनाते हैं।

 

  • जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात,रैदास मनुष ना जुड़ सके, जब तक जाति न जात
  • ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन, पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीन।।