रामायण भारत के विदेश नीति का होगा अहम हिस्सा , जानिए कैसे 

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रामायण हिंदू धर्म के महाकाव्यों में से एक हैं, जिसकी रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी, हिंदू धर्म के अनुसार ये कहानी भगवान विष्णु के राम अवतार की थी जिन्होने धरती से अधर्म को मिटाने और रावण का संहार करने के लिए धरती पर जन्म लिया था, रामायण केवल हिंदू धर्म के लोगो को ही नहीं बल्कि इसमें लिखी बाते पूरी दुनिया को ये दिशा दिखाती है कि एक इंसान को समाज की संरचना कैसे करनी चाहिए और कैसे अपने जीवन को आगे बढ़ाना चाहिए ऐसे ही नहीं ये उदाहरण दे दिया जाता है कि भारत में फिर से रामराज्‍य आएगा, अब यही रामायण भारत के विदेश नीति में अहम भूमिका निभाने वाली है।

सॉफ्ट पॉवर Diplomacy का अहम हिस्सा 

भारत सराकार रामायण को सॉफ्ट पॉवर Diplomacy का हिस्सा बनाने की तैयारी में है, जिसके लिए वो 205 देशों का एक समूह बनाने जा रही है, इसे प्रामाणिक रूप से दूसरे देशों को प्रस्तुत करने के लिए भारत सरकार रामायण के 200 खंडों को फिर से छापने की तैयारी में है, इस बारे में जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग के संयुक्त निदेशक वाइपी सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति को राम के माध्यम से विश्वभर में पहुंचाना है, युवा पीढ़ी को भी इससे जोड़ना है। Soft Power Diplomacy के जरिए आने वाले समय में रामायण भारत की विदेश नीति में एक अहम भूमिका निभाएगा। 

क्या होती है Soft Power Diplomacy 

Soft Power Diplomacy के तहत कोई भी देश अपनी कला, संस्कृति, साहित्य के आधार पर अन्य देशों से रिश्ते बढ़ाने की कोशिश करता है मजबूत करने की कोशिश करता है, इसलिए इसे Soft Power Diplomacy का नाम दिया गया है।