गहलोत बनाम गवर्नर : विधानसभा सत्र बुलाने के लिए राजस्थान CM ने बनाया कोरोना को ‘ढाल’, भेजा अब ये नया प्रस्ताव

राजस्थान में विधानसभा सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्यपाल कलराज मिश्र आमने-सामने आ गए हैं। अशोक गहलोत चाहते हैं कि विधानसभा सत्र जुलाई माह में ही शुरू हो जाए, जिससे वो जल्द से जल्द अपनी सरकार का बहुमत साबित कर सकें लेकिन राज्यपाल कलराज मिश्र का कहना है कि उन्हें विधानसभा सत्र बुलाने के लिए विचार करने का समय चाहिए। दरअसल इसके पीछ राज्यपाल ने कोरोना के बढ़ते मामलों का हवाला दिया है। उनका मानना है कि सोशल डिस्टेंसिंग बहुत जरूरी है, ऐसे में विधानसभा सत्र बुलाना सही रहेगा या नहीं, इसको लेकर विचार करना चाहिए। लेकिन राज्यपाल की तरफ से कोरोना और सोशल डिस्टेंसिंग की बात सुनकर अब अशोक गहलोत ने कोरोना को ही ढाल बना लिया है।

Sachin Pilot Ashok Gahlot

नया प्रस्ताव भेजा गया

बता दें कि गहलोत ने शनिवार की रात को राज्यपाल के पास एक नया प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में 31 जुलाई से विधानसभा सत्र बुलाने की बात कही गई है। सूत्रों की मानें तो इस प्रस्ताव में बहुमत साबित करने का कोई जिक्र नहीं है। प्रस्ताव में राजस्थान सरकार की तरफ से कहा गया है कि, राजस्थान में कोरोना के हालात पर राज्य सरकार चर्चा करना चाहती है। बता दें कि प्रस्ताव के मुताबिक गहलोत कोरोना पर विशेष चर्चा करना चाहते हैं और छह बिल पेश करना चाहते हैं। आपको बता दें कि राजस्थान में फिलहाल टकराव की स्थिति है। इससे पहले शुक्रवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को लेकर गहलोत गुट के विधायकों ने राजभवन में धरना दिया था। इस दौरान राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधायकों से बात भी की। हालांकि गहलोत गुट अभी भी विधानसभा सत्र बुलाने के लिए अड़ा हुआ है। अब सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 31 जुलाई से विधानसभा का सत्र बुलाने की मांग की है।

Sachin Pilot Ashok Gahlot pic

6 बिलों को विधानसभा में पेश करना है

सूत्रों ने मुताबिक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को ही रात कैबिनेट से इसका अनुमोदन करा लिया था मगर शनिवार दिनभर कानूनविदों से चर्चा की गई और उसके बाद सरकार ने प्रस्ताव भेजा है। इसमें कहा गया है कि राज्य में 6 बिलों को विधानसभा में पेश करना है। विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बिजनेस एडवाइजरी कमेटी तय करती है लेकिन फिलहाल हम 6 बिल विधानसभा में पेश करेंगे।

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र को राज्य सरकार के अधिकारों को बताते हुए प्रस्ताव में लिखा है कि, सरकार के पास संवैधानिक अधिकार होता है कि वह सत्र बुलाए और अल्प अवधि में पहले भी आपके द्वारा दो बार सत्र आहूत की गई है। इसमें सरकार ने कहीं भी नहीं लिखा है कि वह विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना चाहती है। दरअसल राज्यपाल भी सरकार से ही पूछ रहे थे कि आखिर वह विधानसभा सत्र क्यों बुलाना चाहती है और उनका एजेंडा क्या है।

kalraj mishra ashok

19 विधायकों को अयोग्य करार देने की चाल

दरअसल जिस हिसाब से गहलोत सरकार विधानसभा सत्र बुलाने के लिए बेकरार हैं उसको लेकर माना जा रहा है कि, गहलोत सरकार सत्र बुलाकर बिल के जरिए व्हिप जारी कर सचिन गुट के 19 विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष से अयोग्य साबित करा देंगे और उसके बाद सदन में विधायकों की कुल संख्या कम हो जाएगी तो सरकार खुद ही बहुमत में आ जाएगी। इसके बाद ही गहलोत सरकार सदन में बहुमत साबित करेगी। अब देखना ये है कि गहलोत सरकार के इस प्रस्ताव पर राज्यपाल अपनी तरफ से क्या रूख अपनाते हैं।