कांग्रेस का चीनी कम्यूनिस्टों से संबंध और ‘राजीव गांधी फाउंडेशन’, जानिए क्या है पूरा मामला

राजीव गांधी फांउडेशन को लेकर देश में इस समय बड़ा हो- हल्ला मचा हुआ है. बीजेपी ने आरोप लगाया  है कि राजीव गांधी फाउंडेशन जिसकी अध्यक्षा खुद सोनिया गांधी हैं को यूपीए के शासनकाल में चीन से भारी चंदा मिला. इतना ही नही इस फाउंडेशन को तत्कालीन यूपीए सरकार की ओऱ से भी फंडिंग की गई. बीजेपी का आरोप है कि इस फंडिंग की आड़ में चीनी कंपनी को भारत में बहुत बड़े पैमाने पर ठेके दिए गए. चीन औऱ इस फाउंडेशन की साठगॉठ से न केवल चीनी कंपनियों को मोटा लाभ दिलाया गया बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी भारत को काफी नुकसान हुआ. आइए जानते हैं क्या पूरा मामला.

राजीव गांधी फाउंडेशन ने चीन से लिया चंदा

राजीव गांधी फाउंडेशन

बात 1991 की है जब राजीव गांधी की मृत्यु के बाद लोगों में उपजे सहानुभूति का भुनाने के लिए कांग्रेस ने राजीव गांधी फांउडेशन की नींव रखी. इस फाउंडेशन का अध्यक्ष खुद राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी को बनाया गया. फाउडेंशन की शुरुआत 21 जून 1991 से की गई. फाउंडेशन की वेबसाइट की मानें तो 1991 से 2009 के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, महिला बाल विकास, शारीरिक अक्षम और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में फाउंडेशन ने काफी काम किये हैं.

इस फाउंडेशन में काग्रेंस के कुछ जाने-माने नेताओं को ट्रस्टी बनाया गया है, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी.चिदंबरम, मोंटेक सिंह आहलूवालिया, राहुल गांधी, शेखर शाहा, सुमन दुबे, प्रोफेसर एम एस स्वामीनाथन, डॉ. अशोक गांगुली, संजीव गोयनका और प्रियंका गांधी शामिल हैं.

फाउंडेशन को बड़े पैमाने पर चीन से मिला चंदा

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में खासकर यूपीए-I के दौरान फाउंडेशन को चीन से भारी चंदा मिला. 25 जून को एक वर्चुयल रैली के दौरान जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि राजीव गांधी फाउंडेशन जिसकी अध्यक्षा खुद सोनिया गांधी है ने चीन जैसे देश से चंदा लेकर भारतीय हितों की अनदेखी की. उन्होंने कहा कि फाउंडेशन ने 2005-2006 में चीनी दूतावास और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से 3 लाख अमेरिकी ड़ॉलर लिए. इस चंदे के बदले चीनी कंपनियों को भारतीय बाजारों में ठेके दिलाए गए. जिससे यहां के उद्योगों को भारी नुकसान हुआ.

प्रधानमंत्री राहत कोष से भी राजीव गांधी फाउंडेशन को दिया गया पैसा

बीजेपी का आरोप है कि पीएम राहत कोष से भी राजीव गांधी फाउंडेशन को भरपूर पैसा दिया गया. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 1991 में देश के वित्तमंत्री थे तब उन्होंने बजट में इस फाउंडेशन को 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे. इतना ही नही 2005 से 2009 तक हर साल फाउंडेशन को पैसे दिए गए. भगोड़े अपराधी औऱ हीरे के व्यापारी मेहुल चौकसे से भी फाउंडेशन को चंदा मिला. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सवालिया लहजे में कहा कि कांग्रेस ने अपना हित साधने के लिए देशहित का बलिदान कर दिया.

यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस की सरकार इस हद तक जा सकती है कि चंदे के बदले देशहित को ताक पर रख दिया जाय. जिस कांग्रेस के शासनकाल में चीन ने भारतीय जमीन पर कब्जा जमाया था जो आए दिन सीमा पर आंखे दिखाता है उसी चीन से चंदा लेना कहां तक वाजिब है.

केन्द्रीय मंत्री ने भी उठाए सवाल

केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस को घेरते हुए पूछा है कि आखिर किसने राजीव गांधी फाउंडेशन को अधिकार दे दिया कि वह करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से खेले. रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि यह कोई आरोप नही बल्कि खुलासा है जिनके पूरे कागजात उनके पास है. कानून मंत्री ने पूछा है कि आखिर कैसे कांग्रेस पार्टी का चीन से इतना प्रेम बढ़ गया जबकि इनके शासनकाल में ही चीन ने भारत की जमीन को हथिया लिया था.

बिहार के मुख्यमंत्री सुशील मोदी का आरोप

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि राजीव गांधी फाउंडेशन को मिला चीनी चंदा दरअसल भारतीय उद्योगों को बरबाद करने के लिए दिया गया रिश्वत था.

सुशील मोदी ने कहा कि चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच समझौते से देश की अर्थव्यवस्थता को भारी कीमत चुकानी पड़ी है. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार द्वारा चीनी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार को खोल देने से भारत के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग बुरी तरह पिट गए.

कांग्रेस क्या कहती है

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने ने बीजेपी के आरोपों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी द्वारा लगाया जा रहा आरोप असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है. पूर्व वित्तमंत्री ने पूछा कि क्या राजीव गांधी फाउंडेशन द्वारा चीन को पैसा वापस लौटा देने से चीन लद्दाख में अतिक्रमण खत्म कर देगा और क्या पहले जैसी स्थिति बहाल हो जायेगी. पी चिदंबरम ने कहा कि 15 साल पहले जो अनुदान मिल चुका है उसका लद्दाख के गलवान घाटी में हो रहे झड़प से क्या लेना-देना. औऱ अगर राजीव गांधी फाउंडेशन चीन द्वारा दिए गए फंड को लौटा देती है तो क्या प्रधानमंत्री मोदी यह आश्वत करेंगे कि चीन सीमा पर से अतिक्रमण हटा लेगा.

उधर काग्रेंस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी बीजेपी के आरोपों को मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है. उन्होंने कहा कि दिव्यांगों के कल्याण और भारत-चीन संबंधों पर शोध के लिए राजीव गांधी फाउंडेशन को यह अनुदान मिला था.

जो भी हो चंदे की बात नही है यहां पर देशहित सर्वोपरि होना चाहिए चाहे कोई भी पार्टी हो. चीन जैसे देश के प्रति अपनापन दिखाना न पहले ही न्यायसंगत था न आज के समय में है. पंडित नेहरु के जमाने में ही हिन्दी चीनी भाई-भाई का नारा लगा था और फिर उनके शासन काल में ही चीन ने भारत के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया. राजीव गांधी फाउंडेशन को लेकर एक बात तो तय है जो कि कांग्रेस नेताओं के बयान से भी स्पष्ट है कि चीन से चंदा लिया गया अब किस मद में लिया गया और इससे देश को कितना नुकसान हुआ यह जांच का विषय है.