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सचिन पायलट के मुद्दे पर, पार्टी के ही इन नेताओं ने कांग्रेस को बड़ी नसीहत दी है !

राजस्थान में जारी सियासी घमासान के बीच सचिन पायलट को उप-मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया है उनके साथ अन्य दो मंत्रियों को भी पद से हाथ धोना पड़ा है. जिन दो मंत्रियों को हटाया गया है उनमें पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह और खाद्य आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा शामिल हैं. सचिन पायलट भले ही कांग्रेस के खिलाफ बगावती सुर अपनाये हुए हों लेकिन उनके इस बगावत के पीछे बड़ी बू नजर आ रही है. दरअसल पार्टी के अंदर ही बहुत लोग सचिन पायलट के मुद्दे पर कांग्रेस आलाकमान से खुश नही है. वह सचिन पायलट के समर्थन में खुलकर तो सामने नही आ रहे हैं लेकिन वह यह बताने की पूरी कोशिश कर रहे हैं अगर ऐसी ही पार्टी से एक एक कर लोग जाते रहे तो आखिर में कौन बचेगा.

सचिन पायलट

सब चले गए तो बचेगा कौन

सचिन पायलट को लेकर संजय निरुपम ने बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि बेहतर हो कि पार्टी बैठकर उन्हें समझाए और रोकने की कोशिश करे. उन्होंने कहा कि पार्टी में कुछ लोग सोच रहे होगें कि जिसे जाना हो जाय हम क्यों रोकें, लेकिन ऐसी सोच गलत है. यह सोचना आज के संदर्भ में कहीं से भी ठीक नही है. माना कि एक के जाने से पार्टी का कुछ नही होगा. लेकिन अगर ऐसे ही एक-एक कर सब चले गए तो आखिर में बचेगा ही कौन.

सिब्बल की सलाह

राजस्थान में सचिन पायलट औऱ अशोक गहलोत के बीच अनबन की खबर आने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि अपनी पार्टी के लिए चितिंत हूं. क्या घोड़ों के अस्तबल से निकलने के बाद ही हम जागेंगे. हालांकि अपने इस ट्वीट में उन्होंने किसी का नाम नही लिया था लेकिन उनका इशारा कांग्रेस की ही तरफ था.

मेहनत किसी का, सीएम किसी को बना दिया

पार्टी के ही एक और नेता संजय झा ने भी कांग्रेस को बड़ी नसीहत दी है. उन्होंने सोमवार को एक ट्वीट कर कुछ ऑकड़े प्रस्तुत किए थे. साथ ही कहा था चुनाव के दौरान मेहनत किसी ने की और मुख्यमंत्री किसी और को बना दिया. बता दें कि संजय झा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे हैं लेकिन पिछले दिनों पार्टी के खिलाफ एक लेख की वजह से उन्हें हटा दिया गया था.

मुद्दे को सुलझाया जा सकता है दुख है कि मामला यहां तक पहुंच गया

पार्टी के ही एक और कद्दावर युवा नेता जितिन प्रसाद सचिन पायलट के मुद्दे पर पार्टी आलाकमान से खुश नही हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि सचिन पायलट न सिर्फ हमारे सहयोगी बल्कि अच्छे मित्र भी हैं. इस तथ्य से कोई इंकार नही कर सकता कि उन्होंने इतने साल तक पार्टी की पूरी लगन से सेवा की है. इस मुद्दे को अभी भी सुलझाया जा सकता है. दुख है कि मामला यहां तक पहुंच गया है.

बता दें कि सचिन पायलट सहित तीन मंत्रियों को भले ही बगावती सुर के कारण सरकार से निकाल दिया गया हो लेकिन अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार की स्थिति बहुत ठीक नही है. खबर के अनुसार गहलोत सरकार के पास 104 विधायकों का समर्थन है लेकिन उसमें से कुछ विधायकों ने सरकार पर उन्हें बंधक बनाने का आरोप लगाया है. अगर यह विधायक पार्टी से अलग हुए तो कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ जायेगी. राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटे हैं और बहुमत के लिए 101 विधायक होने जरुरी हैं.