‘सचिन पायलट’ के फेसबुक पोस्ट से सियासी गलियाऱों में खलबली, कई तरह की अटकलें तेज !

राजस्थान मे सियासी संकट हर पल करवटें बदल रहा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा राज्यपाल से विधानसभा सत्र बुलाये जाने की मांग को लेकर कुछ हल निकालता दिख रहा था कि इस बीच सचिन पायलट के एक फेसबुक पोस्ट ने सियासी गलियारों में नया तूफान खड़ा कर दिया है. उन्होंने अपने फेसबुक एकाउंट से केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के स्थापना दिवस पर उन्हें शुभकामनाएं भेजी हैं. इस पोस्ट में कांग्रेस का निशान हाथ का पंजा साफतौर पर देखा जा सकता है साथ ही इसमें सचिन पायलट के साथ आईएनसी राजस्थान भी लिखा हुआ है. पायलट के इस पोस्ट के बाद कई तरह की अटकलें लग रही हैं. कुछ लोग कयास लगा रहे हैं कि वह कांग्रेस मे ही रहेंगे.आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

सचिन पायलट

सचिन पायलट के सोशल मीडिया पोस्ट से सियासी गलियारे में तूफान

राजस्थान में मचे सियासी घमासान के बीच सचिन पायलट के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नया भूचाल ला दिया है. सचिन पायलट ने फेसबुक पर एक के बाद एक तीन पोस्ट किए हैं जिसके बाद अटकलों का बाजार गर्म है. सचिन पायलट ने पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के नाम से मशहूर एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धाजंलि दी है.

इसके अलावा उन्होंने केन्द्रीय रिजर्व बल के स्थापना दिवस पर बधाई दी साथ ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को उनको जन्मदिन की शुभकामानाएं दी हैं. इन पोस्ट में से दो पर सचिन पायलट ने जिन तस्वीरों को उपयोग किया है उन सब में आईएनसी राजस्थान के अलावा कांग्रेस के हाथ के पंजे का तस्वीर भी लगा हुआ है जिसके बाद कई तरह के कयास लगने शुरु हो गए हैं.

सचिन पायलट के रवैये में पिछले कुछ दिनों से कोई बड़ा बदलाव नजर नही आया है. उन्होंने कांग्रेस या कांग्रेस से जुड़े किसी नेता के खिलाफ अभी तक कोई अनर्गल बातें नही की हैं. यही नही वह कांग्रेस नेताओं से संपर्क में भी हैं जिनमें सोनिया और राहुल गांधी शामिल है. जहां एक ओर उनका व्यवहार कांग्रेस से जुड़े नेताओं का साथ सामान्य हैं तो वहीं उनके फेसबुक पोस्ट से ऐसा लग रहा है कि सचिन अभी भी कांग्रेस में अपने लिए जगह ढूंढ रहे हैं.

राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने की अनुमति दी

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई दिनों से विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग कर रहे थे. इसके लिए उन्होंने ऐड़ी-चोटी का जोर लगाते हुए राजभवन के साथ जारी गतिरोध को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखा. अब जाकर राज्यपाल कलराज मिश्र ने प्रदेश की सरकार को विधानसभा सत्र बुलाए जाने की अनुमति दी है. हालांकि उन्होंने कुछ शर्तें भी लगा दी हैं.

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र

राज्यपाल ने संविधान का हवाला देते हुए कहा है कि 21 दिनों का नोटिस देने के बाद ही विधानसभा सत्र बुलाया जाए. साथ ही विश्वासमत संबंधी पूरी प्रकिया संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की मोैजूदगी में संपन्न हों. जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई जाए. इसके अलावा राज्यपाल ने कोरोना वायरस की खतरनाक स्थिति को देखते हुए इससे बचने के सभी उपाय अपनाने के निर्देश दिए हैं.