रीवा स्थित एशिया के सबसे बड़े ‘सोलर पावर प्रोजेक्ट’ से चलेगी दिल्ली की मेट्रो !

भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. मध्यप्रदेश के रीवा में स्थित एशिया के सबसे बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट का शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन किया. इस सोलर पार्क में ढाई-ढाई सौ मेगावाट की तीन यूनिट लगाई गईं हैं जिसमें से कुल 750 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जायेगा. प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए इस सोलर पावर प्रोजेक्ट को देश को समर्पित किया. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य केन्द्रीय मंत्री भी उद्घाटन के इस मौके पर शामिल हुए. सबसे बड़ी बात यह है कि यहां उत्पादित बिजली का बड़ा हिस्सा दिल्ली मेट्रो रेल परियोजना को दिया जायेगा जिससे मेट्रो का परिचालन होगा.

दिल्ली मेट्रो

रीवा स्थित सोलर प्लांट की ऊर्जा से चलेगी दिल्ली की मेट्रो

रीवा स्थित सोलर पावर प्लांट में उत्पादित विद्युत का 24 फीसदी दिल्ली मेट्रो को दिया जायेगा. बाकी  76 प्रतिशत बिजली मध्यप्रदेश के राज्य विद्युत वितरण कंपनी यानि डिस्कॉम को आपूर्ति की जायेगी.   दिल्ली मेट्रो रेल नेटवर्क करीब 389 किलोमीटर है. एक अनुमान के अनुसार मेट्रो के परिचालन से लेकर अन्य कामों में सालाना बिजली खपत करीब 280 से 300 मेगावाट के बीच है. जिसमें से 99 मेगावाट की आपूर्ति अब रीवा से की जायेगी जो कुल खपत का 32 फीसदी है. मेट्रो को यह सौर चालित ऊर्जा 3.30 रूपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिलेगी जो कि बिजली के दामों से काफी सस्ती है. मेट्रो को बिजली की दरें 6.25 रूपये प्रति यूनिट पड़ती हैं.

रीवा के बदवार पहाड़ियों पर स्थित है यह सोलर प्लांट

देश ही नही बल्कि एशिया का सबसे बड़ा अल्ट्रा मेगा सौर विद्युत परियोजना रीवा में स्थापित किया गया है. 750 मेगावाट की यह परियोजना रीवा जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित बदवार की पहाड़ियो पर है. लगभग 1590 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह सोलर प्लांट एशिया का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट है.

सोलर पावर प्लांट, रीवा

माना जा रहा है कि इस परियोजना से हर साल लगभग 15 लाख टन कार्बन-डाइऑक्साइड के बराबर कार्बन उत्सर्जन कम होगा. यह दो करोड़ 60 लाख पेड़ लगाने के बराबर है. रीवा का यह सोलर प्लांट आत्मनिर्भर भारत तथा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.

सोलर परियोजना से रीवा को नई पहचान

रीवा को सफेद शेरों की धरती कहा जाता है. इसके अलावा यहां कुछ अन्य प्राकृतिक सौंदर्य के स्रोत हैं जिसके कारण रीवा की पहचान होती है लेकिन अब एशिया के सबसे बड़े सोलर प्लांट के रीवा में स्थापित होने से इसको अलग पहचान मिली है.

इस परियोजना का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले रीवा की पहचान मां नर्मदे और सफेद शेर से होती थी लेकिन अब इसके साथ एक औऱ चीज जुड़ गई और वह है एशिया का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट. यह सोलर परियोजना इस शताब्दी की जरुरतों को पूरा करने के लिए मील का पत्थर साबित होगी. उन्होंने कहा कि रीवा सौर परियोजना ने सस्ती और ग्रीन बिजली देश को उपहार में दिया है. इससे श्योर, सिक्योर और प्योर ऊर्जा मिलेगी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

सोलर जनित बिजली उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

रीवा स्थित सोलर पावर प्लांट से 750 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा. यह भारत के लिए गौरव की बात है. इससे न केवल सोलर जनित बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी. ऊर्जा के अन्य स्रोत समाप्त हो सकते हैं लेकिन सूर्य ऊर्जा हमेशा मिलता रहेगा. जहां एक औऱ दुनिया के देश पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों को लेकर चिंतित हैं. साथ ही ग्रीन एनर्जी के स्रोतों का पता लगाने में अपने अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खर्च कर रहे हैं ऐसे में भारत ने इस सौर जनित प्लांट से 750 मेगावाट क्षमता का विदयुत उत्पादन कर बड़ा मिशाल कायम किया है. यह अन्य देशों के लिए उदाहऱण हो सकता है.

बता दें कि इस परियोजना ने कई रिकार्ड अपने नाम किए हैं. इनोवेशन और उत्कृष्टता के लिए इसे ‘वर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसिंडेंट’ एवार्ड मिला है इसके अलावा इसे प्रधानमंत्री की ‘अ बुक ऑफ इनोवेशन: न्यू बिंगनिंग किताब’ में भी शामिल किया गया है. इस सोलर पावर प्लांट को मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड और केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई सोलर एनर्जी कार्पोरशन ऑफ इंडिया की संयुक्त उपक्रम रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड ने विकसित किया है.