राम मंदिर भूमि पूजन पर जिन्होंने मुस्लिमों से कहा कि ‘मायूस ना हों’, अब उनके लिए ही आई मायूसी की खबर!

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पीएम मोदी ने भूमि पूजन तो कर दिया लेकिन उसके बाद देश में तमाम तरह के विरोध के सुर सुनने को मिले। कुछ ने तो बाबरी मस्जिद को लेकर यहां तक कह दिया कि बाबरी थी, है और रहेगी। अब इन्ही बयानों को लेकर मुस्लिम वोटों की राजनीती करने वालों के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। दरअसल भूमि पूजन को लेकर संभल से सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा था कि वो जगह बाबरी मस्जिद थी, बाबरी मस्जिद है और हमेशा रहेगी। उन्होंने कहा था कि मुसलमान अल्लाह के भरोसे पर जिंदा हैं। मुसलमान मायूस ना हों।

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इसके अलावा मौलाना साजिद रशीदी ने कहा था, ‘इस्लाम कहता है कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगी। इसे कुछ और बनाने के लिए नहीं तोड़ा जा सकता है। ऐसे लोगों द्वारा दिए गए बयान पर अब वकील विनीत जिंदल ने एक याचिका दायर की है। अपनी याचिका में जिंदल ने कहा है कि सपा सांसद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड रामलला, उनकी संपत्ति, हिंदू समुदाय और पूजा स्थल के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।

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बता दें कि विनीत जिंदल ने संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना के तहत कार्रवाई करने की मांग वाली याचिका मंगलवार को दाखिल की है। इस याचिका में शफीकुर्रहमान बर्क के अलावा मौलाना मोहम्मद रहमानी और ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ भी अवमानना के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई है।

शफीकुर्रहमान बर्क ने क्या कहा था?

सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा था कि वो जगह बाबरी मस्जिद थी, बाबरी मस्जिद है और हमेशा रहेगी. बीजेपी और आरएसएस ने अपनी ताकत के बल पर अदालत से अपने हक में फैसला करवाकर मंदिर की बुनियाद रखकर जम्हूरियत और सेक्युलरिज्म का कत्ल किया है। देश का मुसलमान मोदी और योगी के रहमो-करम पर नहीं हैं, मुसलमान अल्लाह के भरोसे पर जिंदा हैं। मुसलमान मायूस ना हों।

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मौलाना साजिद रशीदी ने क्या कहा था?

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा था, ‘इस्लाम कहता है कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगी। इसे कुछ और बनाने के लिए नहीं तोड़ा जा सकता है। हम मानते हैं कि वो मस्जिद थी और हमेशा मस्जिद रहेगी। मंदिर को गिराने के बाद मस्जिद की नहीं बनाई गई थी लेकिन अब मस्जिद बनाने के लिए हो सकता है कि मंदिर को तोड़ा जाए।’