मोदी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं उमर अब्दुल्ला की ‘जम्मू-कश्मीर को वापस राज्य’ का दर्जा दिए जाने की मांग

जम्मू-कश्मीर को लगभग एक साल पहले केन्द्रशासित प्रदेश का दर्जा मिला था. अब जबकि राम मंदिर निर्माण को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हुई हैं नेशनल कांफ्रेस के नेता उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर को वापस राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. उन्होनें कहा है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस नही मिल जाता वह विधानसभा चुनाव नही ल़ड़ेंगे. यहां पर समझने वाली बात यह है कि उमर अब्दुल्ला जेल से 24 मार्च 2020 को रिहा हुए थे लेकिन उन्होंने 5 महीने बाद इस तरह की मांग रखी है.

इंडियन एक्सप्रेस अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि 370 हटाने औऱ दो नए केन्द्र शासित प्रदेश बनाए जाने को लेकर वह सड़कों पर विरोध प्रदर्शन नही करेंगें बल्कि वह इसके लिए राजनीतिक और कानूनी लड़ाई लडेंगें. उमर अब्दुल्ला के इस बयान के बाद मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ने वाली है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

नेशनल कांफ्रेस नेता उमर अब्दुल्ला

जेल से रिहा होने के बाद उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को वापस राज्य का दर्जा देने की मांग की

जम्मू-कश्मीर को लेकर नेशनल कांफ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बड़ा बयान दिया है. इंडियन एक्सप्रेस अखबार को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड वापस दिया जाना चाहिए अन्यथा मैं केन्द्र शासित प्रदेश में किसी राजनयिक प्रक्रिया का हिस्सा नही बनूंगा. इसस पहले उमर अब्दुल्ला ने इसी अखबार में सोमवार को एक लंबा लेख भी लिखा था. जिसमें उन्होंने जब तक जम्मू-कश्मीर को वापस राज्य का दर्जा नही मिल जाता तब तक विधानसभा चुनाव नही लड़ने की बात कही थी.

सबसे बड़ी बात यह है कि मार्च मे रिहा होने के बाद उमर अब्दुल्ला पहली बार सक्रिय हुए हैं. अखबार में इतना लंबा लेख लिखा और इंटरव्यू दिया है. इसके पीछे का कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि जिस दिन वह रिहा हुए,उसी रात से कोरोना की वजह से लॉकडाउन पूरे देश भर में लागू हो गया. इसके अलावा वह हिरासत में रखे गए अन्य साथियों के लिए मुसीबत नही बनना चाहते.

5 अगस्त 2019 को लिया गया था हिरासत में

5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाते हुए उसे केन्द्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. इसके कुछ देर बाद ही उमर अब्दुल्ला, उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित कई नेताओं को नजरबंद या गिरफ्तार कर लिया गया था.

2020 में उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत कुछ नेताओं पर पब्लिक सेफ्टी लगा दिया गया था. हालांकि उमर अब्दुल्ला और फारुख अब्दुल्ला को अब रिहा कर दिया गया है लेकिन महबूबा मुफ्ती अब भी हिरासत में है.

कुछ लोगों का मानना उमर और पीएम मोदी के बीच हुई बड़ी डील

अखबार को दिए इंटरव्यू में उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को लेकर कोई बात नही की. उमर अब्दुल्ला एक तरफ जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिए जाने की मांग कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ वह अनुच्छेद 370 को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं. यही नही उन्होंने साफतौर पर कहा है कि अनुच्छेद 370 हटाने और दो नए केन्द्र शासित बनाने को लेकर वह सरकार के फैसले का विरोध सड़कों पर जाकर नही करेंगे. इसके लिए वह राजनीतिक और कानूनी लड़ाई ही लड़ेंगे.

इसी बात को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जोरों पर है कि उमर अब्दुल्ला और प्रधानमंत्री मोदी के बीच डील हुई है. इसीलिए उनकी रिहाई भी हुई है लोगों का मानना है कि उमर अब्दुल्ला की पार्टी स्ट्रीट पर प्रदर्शन करने वाली पार्टी नही है वह उनका मकसद हमेशा सत्ता हासिल करना रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी और उमर अब्दुल्ला

हालांकि उमर अब्दुल्ला ऐसी किसी भी डील से इंकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि ‘’किस तरह की डील? मैं ज्यादा से ज्यादा मुख्यमंत्री के लिए डील कर सकता हूं लेकिन जब मैं आपकी असेंबली को ही नही मानता, चुनाव लड़ने के लिए तैयार नही हूं, जिससे की आप मुझे केन्द्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाओगे, तो फिर मैंने क्या डील की आप लोगों के साथ.’’