अब और कोई आंदोलन नहीं, हर मस्जिद में शिवलिंग की तलाश क्यों? : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का बयान सुर्ख़ियों में है। यह बयान उन्होंने नागपुर में आरएसएस के सबसे बड़े प्रशिक्षण वर्ग तृतीय वर्ष के समापन समारोह के दौरान दिया। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अनेक प्रकार की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। उत्तरप्रदेश के ज्ञानवापी मुद्दे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा हर दिन एक नया मुद्दा नहीं लाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने हर मस्जिद में शिवलिंग की तलाश करने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना? विवाद को क्यों बढ़ाना है? हालांकि ज्ञानवापी विवाद में आस्था के कुछ मुद्दे शामिल हैं और इस पर अदालत के फैसले को सभी को स्वीकार करना चाहिए।

इसके साथ ही आगे आरएसएस प्रमुख ने कहा ज्ञानवापी का एक इतिहास है जिसे हम अभी नहीं बदल सकते हैं, यह इतिहास हमने नहीं बनाया है और न ही इसे आज के हिंदुओं ने बनाया और न ही आज के मुसलमानों ने, यह इतिहास इस्लामिक आक्रमणकारियों के साथ आया था, जिन्होंने देवस्‍थानों को तोड़ा। ऐसे हजारों मंदिर हैं, जो हिंदुओं के दिलों में विशेष महत्व रखते हैं। इन मंदिरों के मुद्दे अब उठाए जा रहे हैं।

आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा हमको जो कुछ कहना था, हमने 9 नवंबर को कह दिया है। राम जन्मभूमि का आंदोलन था जिसमें हम कुछ ऐतिहासिक कारणों से इसमें सम्मिलित हुए। यह कार्य अब पूरा हो गया है। इसके बाद अब हमें कोई नया आंदोलन नहीं करना है।

तृतीय वर्ष के इस कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर मुसलमानों के पूर्वजों को हिंदू बताया है। उन्होंने कहा हिंदू मुसलमानों के विरोधी नहीं हैं। मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे। कई लोगों को लगता है कि जो हिंदुओं का मनोबल को तोड़ने के लिए मंदिरों को तोड़ा गया गया। वहीं अब हिंदुओं के एक वर्ग को लगता है कि इन मंदिरों के पुनर्निर्माण की जरूरत है।

मोहन भागवत ने कहा ज्ञानवापी मुद्दे को दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने की जरूरत है। वहीं अगर दोनों पक्ष अदालत जाने का फैसला करते हैं, तो उन्हें अदालत के फैसले का सम्मान करने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने कहा संविधान और न्यायिक प्रणाली पवित्र और सर्वोच्च हैं। इसके निर्णय को स्वीकार करना चाहिए, किसी को भी फैसले पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।

इस प्रशिक्षण वर्ग में देश भर से 800 से ज्यादा प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में श्रीरामचन्द्र मिशन और हर्टफुलनेस इंस्टिट्यूट के संस्थापक कमलेश देसाई भाई पटेल ने भाग लिया।