भौकाल के मामले में मिर्ज़ापुर के दोनों सीज़न्स है सेम, जानिए केसे!

मिर्ज़ापुर और मिर्ज़ापुर 2 दोनो के ही भौकाल में कोई अंतर नहीं है। यानि सीज़न 1 के कालीन भैया का जलवा और गुड्डू पंडित का बदला सीज़न 2 में भी फ्रंटसीट पर ही हैं। खून-खराबा, ताकत के लिए जंग और किसी पर भी भरोसा गलती साबित होना, दोनो ही सीज़न्स में देखा जा सकता है। कालीन भैया का डायलॉग, ‘राजा और राजकुमार सैक्रिफाइस नहीं करते हैं, प्यादे करते हैं. राजा और राजकुमार तो जिंदा रहते हैं.’ पूरी कहानी को समझाने के लिए काफी है।

mirjapur 2
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मिर्ज़ापुर 2 की कहानी ठीक वहीं से शुरू हो रही है जहां मिर्ज़ापुर की खत्म हुई थी। आइए देखते हैं कहानी किस तरह शुरु हो रही है। मुन्ना भैया हमेशा की तरह अपनी रंगबाजी में हैं। जबकि उनके पिता की नज़र अपने बेटे को बाहुबली बनाने पर है। गुड्डू भैया घायल पड़े हैं तथा मुश्किल में हैं। मुन्ना भैया अब मिर्ज़ापुर के बाद जौनपुर पर भी अपना जलवा चाहते हैं । वे अपने आप को अमर समझने लगे हैं। लेकिन कालीन भैया मुन्ना को ऐसा डोज़ देते हैं कि होश ही फाख्ता कर देते हैं। मिर्ज़ापुर सीज़न्स काफ़ी लोकप्रिय है फिर चाहे वनलाइनर हों, जमकर अपशब्दों का इस्तेमाल या फिर राजनीति का घनघोर खेल। मिर्जापुर 2 में नए पात्रों भी आए हैं।

दोनों ही सीज़न्स में अली फजल, श्वेता त्रिपाठी, पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, रसिका दुग्गल और हर्षिता गौर समेत पूरी स्टारकास्ट ने बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन इस बात को झुटलाया नहीं जा सकता कि मिर्ज़ापुर की जान गुड्डू, मुन्ना और कालीन ही हैं।