लावारिस पड़े महात्मा गांधी के चश्में ने कैसे बदल दी एक बुजुर्ग की जिदंगी, पूरी कहानी जानकर हैरान रह जायेंगे

लेटरबॉक्स में लावारिस हालत मे पड़े एक चश्मे ने ब्रिटेन में बुजुर्ग नागरिक की पूरी जिंदगी ही बदली दी. पिछले महीने ही एक ऑक्शन हाउस के स्टाफ को कंपनी के लेटरबॉक्स में चश्मा पड़ा मिला. बताया जा रहा है कि इस चश्मे का मालिक मैंगोट्सफील्ड का रहना वाला एक बुजुर्ग है. बुजुर्ग ने चश्मे को लगभग 80 वर्षों से संभाल कर रखा हुआ था. इतने सालों तक ऐसे ही पड़े ही इस चश्में को बुजुर्ग ने एक ऑक्शन कंपनी के लेटरबॉक्स में डाल दिया और फिर इस शख्स की किस्मत चमक गई. आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी.

महात्मा गाँधी

लेटरबॉक्स में पड़ा मिला गांधी जी का चश्मा

ब्रिटेन मे एक अजीब वाक्या हुआ है. यहां एक ऑक्शन कंपनी के लेटरबॉक्स में पड़े मिले चश्में से वहां रहने वाले बुजुर्ग की किस्मत चमक गई. दरअसल पिछले महीने ही ऑक्शन हाउस के स्टाफ को लेटरबॉक्स में एक लिफाफा मिला था. इस लिफाफे में कुछ औऱ नही बल्कि गांधी जी का चश्मा था. हालांकि इसका पता लोगों का तब चला जब उस चश्में के बारे में पूरी तहकीकात की गई. बताया जा रहा है कि इस परिवार के पास यह चश्मा पिछली कुछ पीढ़ियों से था.

कैसे लगी बोली

चश्मा प्राप्त करने वाली कंपनी ईस्ट ब्रिस्टल ऑक्शन कंपनी के प्रमुख और नीलामकर्ता एंड्रयू स्टोव ने बताया कि गांधी जी का यह चश्मा केवल 6 मिनट की बोली लगाने के बाद बिक गया. वह भी जो अनुमान लगाया गया था उससे 20 गुना ज्यादा. उन्होंने बताया कि चश्में के लिए 15 हजार पाउंड यानि की करीब 14 लाख रुपये बोली लगने का अनुमान था लेकिन इसकी बोली 2 लाख 60 हजार ब्रिटिश पाउंड यानि की करीब 2.5 करोड़ रुपये लगाई गई. एंड्रयू के मुताबिक यह उनकी कंपनी का नीलामी रिकॉर्ड है. महात्मा गांधी के इन चश्मों को किसने खरीदा इसका खुलासा नही किया गया है लेकिन बताया गया है कि कोई अमेरिकी कलेक्टर ने फोन के जरिए बोली लगाकर इसे खरीद लिया.

नीलाम किया गया गांधी जी का चश्मा

महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में पहने थे चश्में

नीलामकर्ता औऱ ऑक्शन कंपनी के मालिक को यह चश्मा उनके स्टाफ को कंपनी के लेटरबॉक्स में लिफाफे में बंद मिले थे. यह लिफाफा कई दिनों तक लेटरबॉक्स में ही पड़ा रहा लेकिन एंड्रयू को जैसे ही यह मिला उन्होंने इसक जांच की. पता चला कि यह गोल बनावट वाले और गोल्ड प्लेटेड चश्मे गांधी जी अपने शुरुआती समय में पहनते थे. जब वह दक्षिण अफ्रीका में थे. चश्मा मैंगोट्सफील्ड में रहने वाले एक बुजुर्ग को 1920 में अपने एक रिश्तेदार के जरिए मिला था. बताया जाता है कि उनके रिश्तेदारों को यह दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी मिला था. एंड्रयू इसे अपने जीवन की अहम खोज मानते हैं.