MP: शिवराज पुलिस की बर्बरता, दलित किसान के परिवार पर क़हर बनकर टूटी, बिलखते रहे बच्चे

अब सवाल उठता है कि आखिर जमीन से कब्जा हटाने का ये तरीका कितना सही है, क्या अब कानून खुद कानून को हाथ में लेने लगा है।

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वैसे तो प्रदेश में मामा के नाम से जाने जाते हैं लेकिन उनके राज में उनकी पुलिस जो-जो कारनामें कर रही है, वो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि आखिर शिवराज किस श्रेणी के मामा हैं? मध्य प्रदेश के गुना से एक ताजा मामला सामने आये है। गुना का नाम जब आप सुनें तो जेहन में ये भी बात जरूर डालें कि ये गुना जिला कांग्रेस से भाजपा का दामन थामने वाले ज्योतिरादित्य राव सिंधिया का क्षेत्र कहा जाता है। सिंधिया का ये गढ़ माना जाता है।

Shivraj Mama Scindia

बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जो एमपी के गुना जिले का बताया जा रहा है। इस वीडियो को लेकर कहा जा रहा है कि, एक कब्जे वाली जमीन पर पुलिस ने अपना बल प्रयोग करते हुए जमीन को खाली करानी चाही, और दलित किसान और उसके परिवार पर जमकर लाठियां बरसाईं। वीडियो में आप बच्चों के रोने की आवाजें भी सुन सकते हैं। पुलिस का डंडा एक आदमी पर गिरे जा रहा है और उसे पकड़े एक महिला उसके बचाने का प्रयास कर रही है। महिला और बच्चों के सामने पुलिस की मार खाता युवक सिर्फ चीखने के अलावा कुछ कर नहीं पा रहा और ना ही सिस्टम के आगे कुछ कर ही सकता है। इस वीडियो में शख्स को मार खाते देख आपके दिमाग में ये बात जरूर आनी चाहिए कि आखिर इस बर्बरता का लाइसेंस पुलिस वालों को दिया किसने?

जिस जमीन को लेकर पुलिस दलितों की पिटाई कर रही है उसको लेकर ये भी कहा जा रहा है उक्त जमीन पर दलित किसान कई सालों से रह रहा था। बताया जा रहा है कि एसडीएम के नेतृत्व में पुलिस सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने गई थी। उसी समय किसान दंपत्ति ने जहर खा लिया है। महिला की हालत नाजुक बताई जा रही है।

Madhya Pradesh Guna

दरअसल पूरे मामले की को एक सरसरी निगाह से देखें तो पता चलता है कि, मॉडल कॉलेज बनाने के लिए शासकीय कॉलेज प्रबंधन को गुना के कैंट थाना इलाके के जगतपुर चक पर 20 बीघा जमीन आवंटित की गई थी। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले राजस्व विभाग की टीम और पुलिस की टीम ने मिलकर अतिक्रमण हटवा दिया था। इसके बाद जमीन को कॉलेज प्रबंधन को सौंप दिया गया था। लेकिन कुछ समय बाद कुछ लोगों ने फिर से जमीन को घेरना शुरू दिया और खेतीबाड़ी शुरू कर दी।

कॉलेज प्रबंधन की तरफ से राजस्व और पुलिस विभाग को इस जमीन पर कब्जे की शिकायत मिलने पर दोनों की टीम टीम मौके पर पहुंची और खेत में जेसीबी चलवाना शुरू कर दिया। जिसे देख इस जमीन पर खेती कर रहे दम्पति राजू और सावित्री अहिरवार अपनी बात कहने लगे और मामला सरकारी अमले से झड़प तक पहुंच गया। सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस दंपति को पीट रही है। अपनी आंखों के सामने फसल खराब होते देख दंपति ने जहर खा लिया। इस जमीन पर अपना दावा बताते हुए इसपर खेती करने वाले राजकुमार ने बताया कि ये उनकी पैतृक जमीन है। दादा-परदादा इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं।। उनके पास पट्टा नहीं है। जब जमीन खाली पड़ी थी, तो कोई नहीं आया। चार लाख रुपए का कर्ज लेकर बुआई की थी। अब फसल आने लगी, तो इस पर बुल्डोजर चलाया जा रहा है। हमारी मेहनत बेकार जाते देख हमने विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि परिवार में 10-12 लोग हैं, हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

Rau Savitri Guna Child

इस जमीन से कब्जा हटाने को लेकर पति-पत्नी ने पहले ही आत्महत्या की धमकी दी थी। अतिक्रमण हटाने गई टीम ने दंपति की बात नहीं सुनी, तो उन्होंने जहर पी लिया। पुलिस ने दोनों को घसीटकर गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में राजकुमार की पत्नी की हालत नाजुक बताई जा रही है। फिलहाल इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तहसीलदार निर्मल राठौर का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने आए थे, लेकिन यहां खेती कर रहे दंपति ने जहर पी लिया। कार्रवाई रोक दी गई है।

अब सवाल उठता है कि आखिर जमीन से कब्जा हटाने का ये तरीका कितना सही है, क्या अब कानून खुद कानून को हाथ में लेने लगा है। मध्य प्रदेश सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए और जिम्मेदार और इंसानियत को भूल चुके लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए।