दो साल बाद जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल हुए लाखों जगन्नाथ भक्त

तीनों रथ गुंडिचा मंदिर में

भारत की सुप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ यात्रा की अपनी ही एक महिमा है और एक विशेष ख्याति है। जिसमें हर साल लाखों की संख्या में देश भर से भक्त आकर भाग लेते हैं। पिछले सप्ताहांत में, जगन्नाथ रथ यात्रा में भाग लेने के लिए देश भर से दस लाख से अधिक श्रद्धालु पुरी में एकत्रित हुए थे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बड़े पैमाने पर भीड़ इकट्ठा होने के कारण फैलने वाली कोविड बीमारी के जोखिम पर फैसला जारी करने के बाद, पुरी में पिछले दो वर्षों से बिना उपासकों के रथ यात्रा का आयोजन किया गया था। हिंदू कैलेंडर (पंचांग) के अनुसार, आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल निकाली जाती है।

इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 1 जुलाई को ओडिशा के पुरी में शुरू हुई और यह 12 जुलाई, 2022 तक चलेगी। इस बार लोग इस वर्ष की जगन्नाथ रथ यात्रा का प्रत्यक्ष साक्षात्कार कर सकेंगे और भाग भी ले सकेंगे।

हर साल, ओडिशा का पुरी धाम रथयात्रा कार्यक्रम की मेजबानी करता है। यह यात्रा भगवान जगन्नाथ और उनकी रथ यात्रा से जुडी हुई है।

माना जाता है कि यह उत्सव तब शुरू हुआ जब भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने पुरी (ओडिशा राज्य) की यात्रा करने की इच्छा व्यक्त की। भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र, सुभद्रा को साथ लेकर उसकी इच्छा पूरी करने के लिए रथ पर सवार होकर पुरी की ओर चल पड़े। उस समय से, हर साल जगन्नाथ यात्रा के उत्सव को मार्क करने के लिए हिंदू कैलेंडर का उपयोग किया जाता रहा है।

भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, और देवी सुभद्रा जगन्नाथ उत्सव के दौरान गुंडिचा मंदिर जाने के लिए अपने रथ में प्रस्थान करते हैं। वे गुंडिचा मंदिर में आठ दिन बिताते हैं।

उसके बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर से प्रस्थान करते हैं, इस समय की यात्रा को बहुदा यात्रा के रूप में जाना जाता है।