भारत को अंधेरे में रख नया ‘एलएसी’ निर्धारित करने में लगा चीन !

पूर्वी लद्दाख सीमा से चीनी सैनिकों की वापसी को लेकर चीन लगातार झूठ बोल रहा है. पिछले कुछ दिनों से चीन को भारी अंतर्राष्ट्रीय दबाव झेलना पड़ा है बावजूद इसके वह भारत की बातों को ज्यादा तवज्जो नही दे रहा है. इधर मोदी सरकार चीन द्वारा बार-बार दोहराए जा रहे इस दावे पर कि सीमा पर स्थिति नियंत्रण में है और चीनी सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा पर आ गए हैं, लाचार नजर आ रही है. बता दें कि लगातार सैन्य और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर वापस नही हुआ है. स्थिति को देखते हुए भारत ने सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती की है.

झूठ बोल रहा है चीन, अभी भी मई 2020 की स्थिति मे डटे हैं चीनी सैनिक

चीन लद्दाख सीमा पर अपने दोगलेपन से बाज नही आ रहा है. वह लगातार झूठ बोल रहा है कि सीमा पर से चीनी सैनिकों की वास्तविक स्थिति नियंत्रण रेखा पर वापसी हो गई है जबकि अभी भी वह कई पोस्ट पर जस का तस डटा हुआ है. दरअसल प्रधानमंत्री मोदी को लग रहा है कि चीन अंतर्राष्ट्रीय दबाव में झुक जायेगा लेकिन वास्तव में ऐसा हो नही रहा है. चीनी सैनिक एलएसी के जिन स्थानों पर मई 2020 में आ गए थे वह अभी भी वहीं डटे हुए हैं. चीन अधिकारी कह रहे हैं कि स्थिति नियंत्रण में है. इसका मतलब हुआ कि एलएसी के अंदर भारतीय क्षेत्र मे घुस कर वह कह रहे हैं कि स्थिति नियंत्रण में है.

चीन दावा कर रहा है कि उसने गलवान घाट, हॉट स्प्रिंग और गोगरा इलाके से सैनिकों को पीछे हटा लिया है. जबकि असल में अधिकांश तनाव वाले क्षेत्र में चीनी सेना की स्थिति में कोई खास परिवर्तन नही हुआ है.

नया एलएसी निर्मित करने में लगा चीन

सीमा विवाद को सुलझाने के लिए भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई चरणों में बात हो चुकी है लेकिन इस दिशा में हो रहे प्रयासों को चीन जानबूझ कर लंबा खींचने की कोशिश कर रहा है. एलएसी के पास जो स्थिति निर्मित हुई है उससे साफ लग रहा है चीन इस पूरे मामले को ज्यादा तवज्जो नही दे रहा है. वह दिखाना तो यह चाहता है कि सीमा पर स्थिति नियंत्रण में है जबकि वास्तव में गोगरा और पेगोंग इलाके में अभी भी दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने खड़े हुए हैं.

यहां तक की  पैंगोग झील और हॉट स्प्रिंग-गोगरा जैसे इलाकों में एक नई स्थिति निर्मित हो गई है. इन इलाकों में चीन नया एलएसी निर्धारित करने में लग गया है. अगर य़ही स्थिति रही तो चीन पिछले 4 दशक से जो हिस्सा एलएसी का माना जाता था, उसको हथिया लेगा और भारत हाथ पर हाथ धरे बैठा रह जायेगा. इससे न केवल भारतीय सैन्य दल का पेट्रोलिंग दायरा सिमट जायेगा बल्कि मई 2020 से पहले वाली स्थिति भी हाथ से निकल जायेगी.

अपने सैनिकों की वापसी तय करे चीन

हालांकि भारत कह रहा है कि चीन को वास्तविक नियंत्रण रेखा या अप्रैल 2020 वाली स्थिति पर पूरी तरह से लौट जाना चाहिए लेकिन चीन पर भारत के इस खिसे-पिटे राग का कोई असर पड़ता नही दिख रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा- पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी को लेकर कुछ प्रगति हुई है लेकिन वापसी प्रक्रिया अभी पूरी नही हुई है.’ प्रवक्ता ने कहा कि हमें उम्मीद है कि चीनी पक्ष गंभीरता से काम करेगा और पूर्व में विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति के अनुसार सैनिकों की वापसी सुनिश्चित होगी.

सीमा पर भारी मात्रा में भारतीय सैनिक तैनात

चीन की भारत को तवज्जो न देने की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए भारत ने सीमा पर भारी संख्या में सैनिको की तैनाती की है. माना जा रहा है कि पूर्वी लद्दाख में सैन्य् तनातनी अभी काफी लंबी खिंच सकता है. इसको ध्यान मे रखते हुए भारत ने 35 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती की है.