सरकार के लाख दावे के बावजूद लॉकडाउन में मजदूरी करने को मजबूर हुए छात्र, खुली पोल

कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया गया था. इस दौरान लगभग पूरा देश बंद था. सभी कामकाज ठप्प थे. सिर्फ जरूरी सेवायें ही चल रही थी. इस दौरान स्कूल भी बंद थे तो सवाल ये उठता है कि आख़िरकार लॉकडाउन के दौरान जब स्कूल बंद थे तो बच्चे कर क्या कर रहे थे? एक संस्था ने जब इस पर रिसर्च किया तो कर्नाटक से हैरान कर देने वाली बात सामने आई है.

दरअसल स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट (SVYM) ने एक एक सर्वे करवाया ये जानने के लिए कि आखिरकार जब स्कूल और अन्य शैक्षिणक संस्थान बंद हैं ऐसे में छात्र कर क्या कर रहे हैं? स्कूल खोले जाने पर छात्रों की क्या राय है?  जून में किए गए इस सर्वे में राज्य के 1572 स्टूडेंट्स, 452 टीचर्स, 770 पैरेंट्स ने हिस्सा लिया है. इस सर्वे के दौरान ये जानकारी निकल कर सामने आई है कि लॉकडाउन के बाद छात्रों को मजदूरी करना पड़ा. दैनिक मजदूरी के काम में लगने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स हाईस्कूल में पढ़ाई कर रहे थे.

सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे हुए. सर्वे मुख्य रूप से बेंगलुरु, धारवाड़ और मैसूर जिलों में किया गया. तीनों ही जिले कर्नाटक के मुख्य केंद्र माने जाते हैं. वहीँ बेंगलुरु तो राज्य की राजधानी ही है. इस सर्वे में धारवाड़ के 23 प्रतिशत और मैसूर के 15 प्रतिशत पैरेंट्स ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उनके बच्चे दैनिक मजदूरी करने को मजबूर हुए. सोचिये जब सरकारें बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, एलान कर रही हैं, योजनायें ला रही हैं वहीँ दूसरी तरफ जमीनी हकीकत क्या है, इस तरह के आकड़े निकल आपके सामने लेकर आते हैं.

इस सर्वे में ये भी जानकारी सामने आई है कि बेंगलुरु में ऐसे पैरेंट्स का जवाब 7 % कम रहा. तकरीबन 60 प्रतिशत से ज्यादा पैरेंट्स अब भी नहीं चाहते कि स्कूल दोबारा खुलें. वहीँ इस सर्वे में ये भी जानकारी सामने आई कि 55 फीसद बच्चे ये चाहते हैं कि कोरोना की वैक्सीन आने के बाद ही स्कूल खुलें. वहीँ 45 प्रतिशत बच्चों का ये कहना है कि स्कूल खोले जाएँ.

ऐसा नही है बाल मज़दूरी को लेकर भारत की सरकारों ने कोई कदम नही उठाया है लेकिन शायद ये कदम सिर्फ कागजों में उठाये जाते हैं क्योंकि अगर आप भारत के किसी शहर में चल जाएँ तो आपको बच्चे आपको मजदूरी करते हुए आसानी से दिखाई दे जायेंगे. होटल. फैक्ट्री, दूकान पर बच्चों की भरमार हैं. ऐसा भी नही है कि पुलिस को इसके बारें में जानकारी नही है लेकिन कोई कदम ना उठाया जाना उनकी गंभीरता को प्रकट करता है और सरकार के कानून का भी!