मोदी सरकार’ के जबरदस्त प्रहार से जम्मू कश्मीर में आतंकवादियो के हौसले पस्त, अमित शाह निभा रहे चाणक्य की भूमिका !

जम्मू कश्मीर वर्षों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है लेकिन जब से मोदी सरकार 2.0 सत्ता में आई है तब से आतंकवादियों के बीच हाहाकार मचा हुआ है. हाल ही में मोदी सरकार द्वारा लाये गए कानून से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों पर जबरदस्त प्रहार हुआ है. घाटी से आतंकवादियों को सफाया करने में गृहमंत्री अमित शाह अपनी चिरपरिचित भूमिका चाणक्य की निभा रहे हैं. दरअसल नरेंद्र मोदी की सरकार आतंकियों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पहले ही कार्यकाल से प्रतिबद्ध थी. 2014 से पहले जहाँ देश में आतंकवादियों का बोलबाला रहता था वहीं मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से सरकार आतंकवाद के प्रति कठोर कदम उठा रही है.

एक बैठक के दौरान पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी

आतंकियों के खात्मे के लिए NIA और यूएपीए में संशोधन किया गया 

पीएम मोदी ने सत्ता में आते ही अपने इरादे जता दिए थे कि सरकार आतंकवाद और उसके आकाओं का पूरी तरह से सफाया करने जा रही है. य़ही नही जांच एजेंसियों को और ताकत देने का काम भी करेगी. हाल ही में इस दिशा में बड़े कदम उठाए गए जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से संबंधित विधेयक में संशोधन करके इसको और अधिक अधिकार दिये गये. इसके अलावा विधि विरूद्ध क्रियाकलाप निवारण संशोधन विधेयक 2019 (UAPA) को भी मंजूरी प्रदान की गयी है. इससे आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने और देश की सुरक्षा में लगी जांच एजेंसी को काफी मजबूती मिली. इससे पहले विधि विरूद्ध क्रियाकलाप निवारण संशोधन विधेयक 2019 (UAPA) पर दो दिन तक चली चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा था कि-

आतंकवाद सिर्फ बंदूक से जन्म नहीं लेता. जो आतंकवाद का प्रचार करता है वह भी आतंकवादी है. शाह ने कहा, ‘ मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि कानून सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद को समाप्त करने के लिए है. समय आ गया है कि संस्था बदलने वालों को आतंकवादी घोषित किया जाए.’

विधि विरूद्ध क्रियाकलाप निवारण संशोधन विधेयक 2019 (UAPA) कानून आने के एक महीने बाद ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर मौलाना मसूद अजहर को कुख्यात आतंकवादी घोषित कर दिया. हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी और दाऊद इब्राहीम भी इसी श्रेणी में शामिल कर दिए गए.  राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में इस कानून से आतंकवाद पर नकेल कसनी शुरू की. एनआईए के अफसर के लिए आतंकी मामलों में शामिल किसी व्यक्ति की संपत्ति को जब्त करने के लिए संबंधित राज्य के डीजीपी की मंजूरी लेना जरूरी नहीं रहा। केवल एनआईए के महानिदेशक की मंजूरी ही काफी है. केन्द्र की मोदी सरकार के इसी कानून के जरिए अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आतंकवादियों को तबाह करने में लगे हैं.

मोदी सरकार के 6 वर्षों के कार्यकाल में मारे गए 1149 आतंकी

मोदी सरकार के आंतकवाद विरोधी मुहिम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार के 6 वर्षों के कार्यकाल में 1149 आतंकी मारे गए हैं.
SATP यानि की साउथ एशिया टेरोरिज्म पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार नरेन्द्र मोदी सरकार के आने के बाद जम्‍मू-कश्‍मीर में अब तक कुल 1149 आतंकवादी मारे गए हैं. आंकड़ों के अनुसार 2014 में 114 आतंकवादी मारे गए थे। वहीं, 2015 में 115, 2016 में 165, 2017 में 220, 2018 में 271, 2019 में 163 और इस साल यानि की 2020 में 101 आतंकवादियों को मार गिराया गया है.

सुरक्षाबल एक ऑपरेशन के दौरान

इस साल 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का जितना बुरा हाल इस साल हुआ है वैसा पहले कभी नही हुआ. जम्मू कश्मीर में सेना ने आतंकवादियों की कमर तोड़कर रख दी है. इस साल जनवरी से अब तक घाटी में 100 से अधिक आतंकी मारे जा चुके हैं जो कि विभिन संगठनों से जुड़े थे. आंकड़ों की माने तो कश्मीर के दक्षिणी जिलों में अधिकांश आतंकवादी मारे गए.

अलगाववादी नेताओं के अड्डों पर NIA ने की छापेमारी

जम्मू-कश्मीर में सबसे ब़ड़ी समस्या थी आतंकवादियों को अलगाववादी नेताओं के द्वारा शह मिलना लेकिन जब से एऩआईए कानून में बदलाव कर और अधिक अधिकार सुरक्षाबलों को प्रदान किए गए. अलगाववादी नेताओं की हालत पतली हो गई.  
आतंकवादियों को आश्रय और फंडिग देने वाले कश्मीर के अलगाववादी नेताओं पर एनआईए ने कई छापेमारी कर उन्हे या तो गिरफ्तार कर लिया या तो नजरबंद कर दिया गया. खबर के अनुसार 26 फरवरी 2020 को एनआईए के अधिकारियों ने अलगाववादियों के करीब नौ स्थानों पर छापेमारी की. इनमें पाकिस्तान का समर्थन करने वाले अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नईम गिलानी का आवास भी शामिल है. इनके अलावा, लिबरेशन फ्रंट जेकेएलएफ के नेता यासीन मलिक, शब्बीर शाह, अशरफ सेहराई और मीरवाइज उमर फारुख के घरों पर भी छापे मारे गए.

कश्मीरी युवाओं को मुख्यधारा में शामिल किया गया

बड़ी संख्या में कश्मीरी युवा आतंकी समूहों से जुड़ कर अपने रिश्तेदार औऱ धर्म से जुड़े लोगों की हत्या कर रहे थे जिन्हें हथियार उठाने से रोकने के सभी मुमकिन प्रयास किए गए. सुरक्षा बलों ने घाटी के स्थानीय युवाओं से आत्मसमर्पण कराया है और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया.  मोदी सरकार के पारदर्शितापूर्ण शासन से जम्मू कश्मीर के स्थानीय लोगों और वहां के युवाओं में विश्वास बढ़ा. और यही कारण रहा कि आतंकवादी घाटी से लगभाग सफाये की ओर हैं.