कोई भी भारतीय जम्मू-कश्मीर में तो जमीन ले सकता है लेकिन लद्दाख मे नही, जानिए क्या है वजह

केन्द्र की मोदी सरकार ने मंगलवार को बडा फैसला लिया है जिसके तहत अब देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है. जमीन खरीदने के बाद लोग वहां बस भी सकते हैं लेकिन वह इसमें खेती नही कर सकते. गृहमंत्रालय ने मंगलवार को इस संबंध मे अधिसूचना जारी कर दी. जम्मू-कश्मीर में भले ही यह कानून लागू हो गया हो लेकिन लद्दाख में अभी भी ऐसा संभव नही होगा. आइए बताते हैं क्या है इसकी वजह.

जम्मू-कश्मीर
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11 राज्यों में है यह प्रावधान

गृह मंत्रालय की नई अधिसूचना के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. हालांकि लद्दाख में यह अभी लागू नही किया गया है. दरअसल लद्दाख के नेता और सरकार के बीच पिछले महीने हुई बातचीत के बाद LAC पर भारत चीन टकराव को देखते हुए अनुच्छेद 371 के तहत छठी अनुसूची की मांग की गई है. अनुच्छेद 371 में 6 पूर्वोत्तर राज्यों सहित कुल 11 राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक हितों की रक्षा की जा सके. लद्दाखी नेताओं का कहना है कि उनकी 90 प्रतिशत आबादी आदिवासी है इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए.

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केन्द्र का आश्वासन

लद्दाखी नेताओं की इस मांग पर भाजपा नेताओं ने भी अपनी सहमति दी है साथ ही ऐसा न करने पर LAHDC चुनावों के बहिष्कार की भी चेतावनी दी गई थी. दिल्ली में भाजपा नेताओं द्वारा केन्द्रीय मंत्री किरन रिजिजू और जी किशन रेड्डी सहित वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद लद्दाखी नेताओं को बताया गया कि उनकी मांगे मानी जाएगी. इस आश्वासन के बाद ही LAHDC  में भाजपा की जीत हुई और 26 में से 15 सीटें बीजेपी को मिली जबकि कांग्रेस ने केवल 9 सीटें जीतीं थीं.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत अब कोई भी भारतीय नागरिक जम्मू-कश्मीर में फैक्ट्री, घर या दुकान के लिए जमीन खरीद सकता है. इसके लिए उसे किसी भी तरह के स्थानीय निवासी होने का सबूत देने की जरुरत नही होगी.

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केन्द्र सरकार ने पिछले साल जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था. इसके बाद 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश बन गया था. और अब जमीन के कानून में बदलाव किया गया है.