अब दुश्मनों की खैर नही, भारत को मिले यह जाबांज हेलीकाप्टर !

भारतीय वायुसेना दुनिया की शक्तिशाली सेनाओं मे से एक मानी जाती है. इसके लड़ाके किसी भी परिस्थिति और वातावरण में लड़ने में सझम होते हैं. इस बीच चीन से लगती बर्फीली पहाड़ियों पर अपनी ताकत को और मजबूत करने के लिए भारत ने बोइंग से 5 अपाचे लड़ाकू हेलीकाप्टर प्राप्त किए हैं. इससे न केवल भारत की सैन्य ताकत को बल मिलेगा बल्कि सेना के हौसले भी बुलंद होंगे. बता दें कि हाल ही में चीन के साथ तनातनी के बीच भारत ने अपनी फ्लीट को और मजबूत करने के लिए तेजी से काम किया हैं. हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों पर लड़ने के लिए इन हेलकाप्टरों की सख्त जरुरत महसूस हुई थी. इसके बाद यह सौदा जल्द से जल्द पूरा किया गया.

अपाचे हेलीकाप्टर

अब दुश्मनों की खैर नही भारत को मिले यह अपाचे AH-64 E हेलीकाप्टर

भारत ने बोइंग से 20 में से अंतिम 5 अपाचे लड़ाकू हेलीकाप्टर भी प्राप्त कर लिए हैं. इसके साथ ही भारतीय वायुसेना को एक बड़ी ताकत मिल गई है. सीमा पर बेवजह उकसावे की कार्रवाई करने वाले दुश्मनों की हालत पतली होने वाली है. अपाचे एएच-64ई न केवल भारत की रक्षात्मक क्षमता को कई गुना बढ़ायेगा बल्कि यह जमीन पर होने वाले युद्ध में भी दुश्मनों पर भारी पड़ेगा.

वायुसेना को मार्च में ही यह लड़ाकू हेलीकाप्टर मिलने वाले थे लेकिन कोविड-19 के कारण इसके मिलने में देरी हुई. बोइंग ने शुक्रवार को जारी अपने एक बयान में कहा कि कंपनी ने सभी नए एएच-64ई अपाचे और सीएच-47 एफ चिनूक हेलीकाप्टर की आपूर्ति भारतीय वायुसेना को कर दी है.

सितंबर 2015 में भारत ने अमेरिकी कंपनी बोइंग से करीब 2.5 बिलियन डॉलर को एक समझौते को मंजूरी प्रदान की थी जिसके तहत 37 हेलीकाप्टर भारत को मिलने वाले थे. इनमें से 22 अपाचे हेलीकाप्टर और 15 चिनूक हेलीकॉप्टर शामिल हैं.

क्या है अपाचे हेलीकाप्टरों की खासियत

अपाचे लड़ाकू हेलीकाप्टर अपने आप में कई खासियत समेटे हुए हैं. 16 फुट ऊंचे और 18 फुट चौड़े इस हेलीकाप्टर को उड़ाने के लिए 2 पायलट की जरुरत होती है. इसमें दो इंजन लगे होते हैं इसलिए इसकी रफ्तार काफी ज्यादा करीब 280 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. इस हेलीकाप्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी डिजाइन इस तरह की होती है कि इसे राडार से पकड़ पाना मुश्किल होता है.

इसके अलावा यह एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है साथ ही इसमें लगी राइफल में एक बार में 30 एम-एम की 1200 गोली भरी जा सकती हैं. यही नही इस हेलीकाप्टर से 16 एंटी टैंक मिसाइल को भी छोड़ा जा सकता है.

अपाचे हेलीकाप्टर AH-64E

बता दें कि हैदराबाद में बोइंग का टाटा के साथ संयुक्त उद्यम टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (TBAL) है यहां पर अमेरिकी सेना और अन्य अंतर्राष्ट्रीय जरुरत के अनुसार एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर के एयरो स्ट्रक्चर का निर्माण होता है.

चीनी सीमा पर तनातनी के बीच भारत को सख्त जरुरत

हाल ही में भारत और चीन के बीच हुए तनातनी के बीच भारत को अपाचे हेलीकाप्टरों की सख्त जरुरत महसूस हुई थी. भारत की लद्दाख क्षेत्र में 1200 किलोमीटर लंबी सीमा चीन से लगती है. यहां पर ऊंची बर्फीली चोटियां और दुर्गम इलाके हैं जहां पर सेना को किसी भी मिशन को अंजाम देना काफी मुश्किल होता है. अपाचे हेलीकाप्टर को दुनिया का बेहतरीन लड़ाकू हेलीकाप्टर माना जाता है. खासकर यह मांउटेन वारफेयर के लिए काफी उपयोगी है. अपाचे और चिनूक हेलीकाप्टर रात के अंधेरे में भी बर्फीली और तेज हवाओं के बीच आसानी से उड़ान भर सकता है.

हालांकि भारत के पास यह हेलीकाप्टर पहले से ही मौजूद है लेकिन इन 5 और हेलीकाप्टर के शामिल हो जाने से सेना की रही सही कसर दूर हो जायेगी.