चीन की दादागीरी रोकने के लिए भारत ने की बड़ी जंगी तैयारी, सीमा पर तैनात की खतरनाक मिसाइलें !

चीन भारत के साथ हमेशा ही चालबाजी करता रहा है. वहां की कम्यूनिस्ट सरकार तानाशाही की चरम पर है.  चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पिछले 6 सालों में 18 बार भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिल चुके हैं लेकिन जैसा कि हमेशा से होता आय़ा है चीन पीठ पीछे छूरा खोपने से बाज नही आ रहा है. पिछले कुछ दिनों से लद्दाख क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच अब भारत ने कड़ा रूख अख्तियार कर लिया है. चीन को सबक सिखाने के लिए भारत ने पूर्वी लद्दाख औऱ अरूणाचल प्रदेश से लगती अपनी सीमा पर भारी सैनिक साजो-समान की तैनाती की है. जिसमे खतरनाक मिसाइल सिस्टम आकाश भी शामिल है. खबर के अनुसार गलवान घाटी सहित पूर्वी लद्दाख से लगती सीमा पर चीन की तरफ से शांति बरती जा रही है लेकिन चीन की चुप्पी पर भारत को ज्यादा भरोसा नही है इसीलिए भारत की तरफ से यह तैनाती की गई है.

चीन से लगती सीमा पर भारत ने की सैनिकों की तैनाती

एलएसी पर भारत की जंगी तैयारी

भारत और चीन के बीच एलएसी और पूर्वी लद्दाख सीमा पर बढ़ते तनाव के मद्देनजर भारत ने बड़े पैमाने पर सेना और एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात किया है. इसमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आकाश भी शामिल है. यह पलक झपकते ही दुश्मन के लड़ाकू विमानों को हवा में ही ध्वस्त कर सकती है. इसके अलावा सेना की तीऩ और डिविजन की तैनाती चीन से लगती सीमा पर की गई है. भारत की तरफ से यह तैयारी इसलिए की गई है कि युद्ध की स्थिति में चीन को करारा जवाब दिया जा सके.

ऐसा नही है कि सीमापार चीन कुछ नही कर रहा है. चीन की गतिविधि भले ही न दिख रही हो लेकिन वह सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमानों सहित साथ अन्य डिफेंस सिस्टम को सीमा से कुछ ही दूरी पर तैनात कर रखा है. चीन गुपचुप तरीके से अपनी तैयारी कर रहा है. माना जा रहा है वह कभी भी हमला करने की स्थिति में है यह उसके मंसूबे से ही झलक रहा है.

टकराव वाली जगह पर अक्सर चीनी लड़ाकू विमानों को उड़ते हुए देखा गया है

चीन ने हमेशा ही टकराव वाली जगह को निशाना बनाया है उसके लड़ाकू प्लेन अक्सर दौलत बेग ओल्डी, पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 , 15, 17 औऱ 17 ए पर मंडराते रहते हैं. इन्हीं लड़ाकू विमानों को टक्कर देने के लिए भारत ने अपने मिसाइल सिस्टम आकाश को इन सीमाओं पर तैनात किए हैं. इसके अलावा भारतीय फाइटर प्लेन एस-30 एमकेआई को सीमा पर तैनात किया गया जो कुछ ही मिनटों में यहां पहुंच कर मोर्चा संभाल सकते हैं. एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती के बाद भारतीय मोर्चे को पहले से ज्यादा मजबूती मिली है. अब यहां से गुजरने वाले किसी भी चीनी लड़ाकू विमान को हवा में ही इंटरसेप्ट किया जा सकता है.

क्या है आकाश मिसाइल की खासिय़त

  • आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से लैस यह मिसाइल सतह से हवा में मार करने मे सक्षम है औऱ किसी भी मिसाइल को 30 किमी तक की ऊंचाई पर इंटरसेप्ट कर सकती है.
  • आकाश मिसाइल आंतरिक नैवीगेशन सिस्टम, आधुनिक कंम्यूटर और इलेक्ट्रो मैकेनिकल एक्टीवेटर से लैस है.
  • आकाश मिसाइल सुपरसोनिक गति से लक्ष्य को भेदने आ रही मिसाइलों को भी ध्वस्त करने में सक्षम है.
  • भारत के पास आकाश के अलावा अन्य एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं.
आकाश मिसाइल

भारत और चीन किसकी कितनी है ताकत

अगर इस समय भारत और चीन की बीच युद्ध की स्थिति बनती है तो नौसेना की उपयोगिता न के बराबर है लेकिन थलसेना और वायुसेना में दोनो देश एक-दूसरे के कितने पास ठहरते हैं यह जानने लिए इन आंकड़ो पर गौर करना जरुरी है-

चीन में इस समय सक्रिय थल सैनिकों की संख्या करीब 21 लाख 83 हजार हैं. तो वहीं भारत के पास 14 लाख 44 हजार सैनिक सक्रिय हैं इसमें रिजर्व फोर्स की संख्या शामिल नही है. सैनिक साजो समान की बात करें तो पीएलए के पास 3,500 टैंक 3300 सशस्त्र वाहन, 3800 स्वाचालित तोपें और 2600 रॉकेट प्रोजेक्टर शामिल हैं. तो वहीं भारतीय सेना के पास 4292 टैंक, 8686 सशस्त्र वाहन, 235 स्वाचालित तोपें और 266 रॉकेट प्रोजेक्टर शामिल हैं.

वायुसेना की बात करें तो चीन की पीएलए एय़रफोर्स में करीब 1232 लड़ाकू विमान, 371 डेडिकेटेड अटैक एय़रक्राफ्ट, 224 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 281 हमलावार हेलीकाप्टर, 911 हेलीकाप्टर और 111 स्पेशल मिशन विमान हैं. भारतीय वायुसेना के पास 538 लड़ाकू विमान, 172 डेडिकेटेड अटैक एयरक्राफ्ट, 250 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 23 हमलावर हेलीकाप्टर, 722 हेलीकाप्टर और 77 स्पेशल मिशन विमान है.

ऑकड़ों को देखा जाय तो भारत कहीं भी उन्नीस नजर नही आ रहा है. भारतीय सेना हर मोर्चे पर चीनी सेना को टक्कर देने में सक्षम है. सबसे बड़ी बात यह कि भारत की वायुसेना चीनी वायुसेना से हर मोर्चे पर दमदार नजर आ रही है.

एलएसी पर हर जगह भारतीय सेना एलर्ट

चीन को समझना चाहिए कि भारत अब 1962 वाली स्थिति में नही है जब एकतरफा चीन की जीत हुई थी औऱ काफी क्षेत्र चीन ने कब्जा लिया था. भारत कम से कम इस समय तो कोई खतरा मोल नही लेना चाहता इसीलिए उसने पूर्वी लद्दाख के इलाकों सहित अरूणाचल प्रदेश से लगती अपनी सीमा पर सैनिकों को एलर्ट कर दिया है. भारत ने इन सीमाओं पर सेना की तीन डिवीजन को बढ़ा दिया है साथ ही ऊंचाई पर लड़ने मे प्रशिक्षित एक टुकड़ी को 18 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात किया गया है.

भारतीय सेना ने इन स्थानों पर जबरदस्त तैयारी की है और हर मोर्चे पर बराबर सैनिकों की तैनाती की गई है जिससे युद्ध के हालात बनने पर चीन को मुहं तोड़ जवाब दिया जा सके. हालांकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां हर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विभिन्न पार्टी, समुदाय और लोगों से सलाह- मशविरे लिए जाते हैं लेकिन चीन के मामले में बिलकुल उलट है. वहां की तानाशाह सरकार का कोई भरोसा नही. इसलिए यह जरुरी था कि भारत अपनी तरफ से सतर्क और चौकन्ना रहे.