तो क्या भारत मे बदल जायेगी लड़कियों की शादी की उम्र !

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लड़कियों की शादी की उम्र में बदलाव को लेकर बड़े संकेत दिए हैं. 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से भाषण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे को लेकर एक कमेटी बनाई है और उसके सुझावों के आधार पर सरकार जल्द ही फैसला ले सकती है. बताते चलें कि भारत में इस समय लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल है. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह के संकेत दिए हैं उससे लग रहा है कि इसे बढ़ाकर 21 साल किया जा सकता है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री का इशारा बदल सकती है लड़कियों के शादी की उम्र

बीजेपी के नेतृत्व वाली केन्द्र की सरकार लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र सीमा में बदलाव करने जा रही है. लाल किले से भाषण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमने अपनी बेटियों की शादी के लिए न्यूनतम आयु में पुनर्विचार करने के लिए कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी के रिपोर्ट आने के बाद हम उचित फैसला लेंगे. कमेटी उन तथ्यों को देखेगी जो लड़कियों में कुपोषण को कम करने के लिए उठाए जा सकते हैं.

दरअसल पीएम मोदी द्वारा उठाए जा रहे इस कदम के पीछे कई कारण है. माना जा रहा है कि इस फैसले से मातृ मृत्युदर मे कमी आएगी. इसके अलावा उनमें होने वाले कुपोषण को कम करना भी इसका मुख्य लक्ष्य है. बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अपने पिछले बजट भाषण में कहा था कि महिलाओं के सही उम्र मे मां बनने की स्थिति जानने के लिए टास्क फोर्स बनाया जायेगा.

ये हैं गठित समिति में 

1978 में शारदा एक्ट 1929 में बदलाव कर भारत मे लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल की गई थी. अब प्रधानमंत्री ने इस पर पुनर्विचार करने के लिए जो कमेटी बनाई है उसमें जया जेटली के अलावा नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी के पॉल, स्वास्थ्य, महिला और बाल विकास, प्राथमिक और उच्च शिक्षा और विधायी विभाग के सचिव, नजमा अख्तर, वसुधा कामथ और दीप्ति शाह भी इस टास्क फोर्स मे बतौर सदस्य शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को माना जा रहा है आधार

मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे इस पूरे प्रयास के पीछे सप्रीम कोर्ट का एक फैसला है जिसमें कोर्ट ने कहा था कि वैवाहिक बलात्कार से लड़की को बचाने के लिए बाल विवाह को पूरी तरह से अवैध माना जाना चाहिए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के लिए न्यूनतम उम्र के बारे में सही फैसला लेने का काम केन्द्र सरकार पर छोड़ दिय़ा था. यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत मे 27 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले जबकि 7 प्रतिशत लड़कियों की शादी 15 साल की उम्र से पहले हो जाती है.