महाराष्ट्र के लिए पहली बार साइबर आतंकवाद के मामले में एक तकनीकी विशेषज्ञ को दोषी पाया गया और दी गई उम्रकैद की सजा

महाराष्ट्र में पहली बार साइबर टेररिज्म के एक दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. अनीस अंसारी नाम के एक शख्स को कोर्ट ने एक अमेरिकी स्कूल के बच्चों पर हमले की साजिश रचने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई है.

अनीस अंसारी को महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड ने गिरफ्तार किया था, तब से ही उसे जेल में रखा गया है. उसे IPC की कई धाराओं और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कानून के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया है.

एडिशनल जज एए जोगलेकर ने कहा है कि अनीस अंसारी ने भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने के लिए अधिकृत कंप्यूटरों का गलत इस्तेमाल किया था, जो साइबर आतंकवाद के दायरे में आता है.

सेशन कोर्ट ने मुंबई के एक इंटरनेशनल स्कूल में विदेशियों की हत्या की साजिश रचने के मामले में एक कंप्यूटर इंजीनियर को उम्रकैद की सजा सुनाई है. साइबर आतंकवाद के मामले में देश में पहली बार सजा हुई है.

एंटी टेररिज्म स्क्वायड को सूचना मिली थी कि अनीस अंसारी मुंबई के अंधेरी के सीप्ज़ में मेसर्स हियर सॉल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में काम करता है. यह भी पता चला कि अंसारी एसोसिएट ज्योग्राफिक टेक्निशियन में भी काम करता है. उसने अपनी कंपनी के लैपटॉप से उसैरिम लोगान नाम के नाम से एक फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया था. साल 2011 से लेकर 2014 तक उसने कई आपत्तिनजक सामग्री डाउनलोड की थी.

जांच एजेंसी को यह जानकारी मिली थी कि उसने आतंकी संगठन ISIS की गतिविधियों का समर्थन किया था. उमर एल्हाज की मदद से वह मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के एक इंटरनेशनल स्कूल में विदेशी नागरिकों पर हमले की साजिश रच रहा था. वह थर्माइट बम बनाने की जानकारी हासिल कर रहा था. उसे मार्च 2018 में भारत की एकता, संप्रभुता और सुरक्षा को खतरे में डालने की कोशिश और ISIS से लिंक होने की वजह से गिरफ्तार किया गया था.

एडिशनल जज एए जोगलेकर ने 20 अक्टूबर को कहा कि अनीस अंसारी ने भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने के लिए अधिकृत कंप्यूटरों के उपयोग का दुरुपयोग किया, जो साइबर आतंकवाद के दायरे में आता है.

कोर्ट ने 32 वर्षीय अनीस अंसारी को IT एक्ट और IPC की धाराओं के तहत दोषी पाया गया था. भारतीय दूतावास और अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में अधिकारियों के साथ बातचीत के जरिए यह भेद खुला था. चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी के खिलाफ साबित अपराध समाज के लिए खतरनाक है. यह भारत की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को चोट पहुंचा सकता है. इसलिए दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए.