Home न्यूज़ आईआईएम अहमदाबाद ने जारी किया नया लोगो, संस्कृत का श्लोक रखा यथावत

आईआईएम अहमदाबाद ने जारी किया नया लोगो, संस्कृत का श्लोक रखा यथावत

विश्व के श्रेष्ठतम प्रबंध संस्थानों में शुमार भारतीय प्रबंध संस्थान-अहमदाबाद (आईआईएम-ए) ने गुरुवार को नया लोगो को अपनाने की घोषणा कर दी। नए लोगो में संस्कृत सूत्र वाक्य को बरकरार रखा है। अपनी स्थापना 1961 के बाद यह पहला मौका है, जब संस्थान अपना लोगो बदलने जा रहा है। नए और पुराने लोगो में अंतर की बात करें तो पुराने लोगो में आईआईएम के बाद अहमदाबाद पूरा लिखा गया था, जबकि नए लोगो में आईआईआईएमए लिखा गया है। पुराने लोगो में संस्कृत सूत्र वाक्य आईआईएम-अहमदाबाद के ऊपर लिखा गया था, जबकि नए लोगो में यह आईआईएम-ए के नीचे लिखा गया है। आईआईएम-ए के निदेशक प्रो.एरोल डिसूजा ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में संस्थान के नए लोगो को अपनाने और उसे जारी करने की घोषणा की।

संस्थान की ओर से कहा गया कि लोगों की पहचान जाली को भी इसमें बरकरार रखा है, जाली के कार्य को स्पष्ट और सशक्त लाइनों और गोलाइयों के साथ नेवी ब्लू रंग दिया गया है। जिसमें लोगो आर्ट के मूल्य सौंदर्य घटक को बरकरार रखा है।ज्ञात हो कि लोगो में बदलाव की बात सामने आने पर आईआईएम-ए के 45 प्राध्यापकों ने विरोध दर्ज कराया था। इसे देखते हुए नए लोगो को लागू करने का निर्णय टाल दिया गया था।

आईआईएमए की ओर से घोषणा की गई कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने निर्णय किया है कि पुराने कैंपस की जर्जरित इमारतों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा। निर्णय के तहत संस्थान के छात्रावास डी 15 के अलावा फैकल्टी ब्लॉकों, कक्षा परिसर, और छात्रावासों में कोई भावी पुनरोद्धार कार्य जारी नहीं रखा जाएगा। सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद फैकल्टी ब्लॉकों, कक्षा परिसरों और छात्रावासों 16 से 18 का पुननिर्माण कराया जाएगा। इसके लिए एक आरएफपी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अन्य छात्रावासों को लुइस कान्ह विरासत के अनुरूप रिमॉडल किया जाएगा। कैम्पस के वर्तमान और भावी निवासियों की प्रकार्यात्मक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा।

संस्थान ने पुराने कैंपस में स्थित इन इमारतों का आईआईटी रुडक़ी के संरचना और भूकंप संबंधी इंजीनियरों के जरिए मूल्यांकन कराया था। उसके बाद एक अंतरराष्ट्रीय समूह कि जिसमें पुनरोद्धार विशेषज्ञ, वास्तुकार, और संरचना इंजीनियर शामिल थे उससे भी रिपोर्ट तैयार कराई। पूर्वछात्रों और फैकल्टी से चर्चाओं के बाद बोर्ड ने निर्णय किया।