यम और यमुना के बीच घटी वो अलौकिक घटना जिस कारण मनाया जाता है भाईदूज

देशभर मे आज भाईदूज का त्योहार बडे़ धूमधाम से मनाया जा रहा है । इस त्योहार मे बहन भाई को तिलक लगा कर उसके लंबे आयु की कामना करती है वही भाई उसके लिए नए – नए गिफ्ट लाकर उसे भी इस बात की बधाई देता है । इसे यम द्वितिया के नाम से भी जाना जाता है ।दरअसल शाम  के समय बहनें भाइयों की लम्बी उम्र की कामना के लिए यमदेव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से अपने दरवाजे पर चार मुखवाला दीप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाती हैं। आइए जानते है भाईदूज मनाने के पीछे घटी यम और यमुना की वो अलौकिक घटना ।

यम
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यम और यमुना के बीच की है कहानी

ये अलौकिक घटना यम और यमुना के बीच घटी थी जो कि आपस मे भाई – बहन थे । दोनो भाई बहन एकदूसरे से  बड़ा प्रेम करते थे । यमुना अपने  भाई  से बार-बार निवेदन करती कि वह उसके घर आयें और भोजन करें। यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल जाते। बहुत समय व्यतीत हो जाने पर एक दिन यमराज अपनी बहन को बिना बताए अपनी बहन के पास पहुंच गए । लेकिन वहां पहुंचने पर पता चला कि यमुना वहां नही है

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गोलोक मे मिली यमुना

उन्होने यमुना को वहां हर जगह ढूंढा लेकिन यमुना उन्हे नही मिली फिर उन्होने इंद्रलोक  – कैलाश हर जगह तलाश की इसी क्रम मे वो गोलोक पहुंचे जहां विश्राम घाट पर यमुना जी से भेंट हुई, भाई को देखते ही यमी ने भावविभोर हो उनका स्वागत सत्कार किया तथा उन्हें परम स्वादिष्ट भोजन करवाया।

यमराज ने दिया वरदान

इससे प्रसन्न हो यमदेव ने कहा बहन ! वरदान में जो चाहे मांग लो, बहन यमी के मन में जन कल्याण की चिंता हुई और उन्होंने कहा, भैया मुझे वरदान दो कि जो प्राणी मेरे जल में स्नान करें उन्हें यमपुरी की कठोर यातनायें न सहनी पड़े। जनकल्याण के प्रति बहन की व्याकुलता देख यमदेव ने कहा, ‘एवमस्तु’ ! अर्थात ऐसा ही हो ! किंतु जो प्राणी अपनी बहन का तिरस्कार करेंगें उन्हें बार-बार अपमानित करेंगे उन्हें मैं यमपाश में बांधकर यमपुरी ले जाऊँगा फिर भी यदि वह तुम्हारे जल में स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य देगा तो उसे स्वर्गलोक में स्थान मिलेगा। तभी से यह त्योहार मनाया जाता है।