5000 साल पुराना है बेशक़ीमती कोहिनूर, जानिए इसके बारे में कुछ रोचक तथ्य…

कोहिनूर हीरा एक ऐसा रत्न है जो धरती पर मौजूद सभी नगों एवं रत्नों से अलग तथा अद्भुत है। यही कारण था कि राजा – महाराजाओं में भी इसे एक शान की तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन हीरों का भी हीरा “कोहिनूर” सबसे अधिक प्रसिद्ध, पुराना तथा महंगा हीरा है। इसकी चमक हीरों में इसे अत्यंत बेशकीमती बनाती है। जितना सुंदर हीरा उतना सुंदर अर्थ! कोहिनूर शब्द का अर्थ “प्रकाश का पर्वत” या “प्रकाश की श्रंखला” होता है।

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कोहिनूर का बेशक़ीमती इतिहास!!

कोहिनूर अपने अंदर एक बहुत पूराना इतिहास संभाले हुए है। आज या कल से नहीं बल्कि लगभग 5000 वर्षों से कई देशों के राजाओं के हाथों से सफ़र करता हुआ आज लंदन के टावर में सुरक्षित रखा हुआ है। संस्कृत भाषा में सबसे पहले हीरे का उल्लेख “स्यामंतक” के नाम से किया गया था। 1339 में ये माना जाता था की जो भी पुरुष इस हीरे को पहनेगा उसे श्राप लगेगा एवं वह कई दोषों से घिर जाएगा। इसे केवल कोई औरत या भगवान ही पहन सकते हैं, जो इसके सभी दोषों से दूर रह सकेंगे। मान्यता है की कोहिनूर बहुत से मुग़ल शासक के अधीन रहा है। उन शासकों में से कुछ हैं:

  • 14वीं शताब्दी में दिल्ली के शासक, अलाउद्दीन खिलजी।
  • 1526 में मुग़ल शासक, बाबर (जिनके शासनकाल में इसे “बाबर का हीरा” कहा गया था)।
    बाबर के वंशज, औरंगजेब, हुमायूँ तथा महमद।
  • 1739 में परसिया के राजा नादिर शाह जिन्होंने इसे “कोहिनूर” का नाम दिया।
    जनरल अहमद शाह दुर्रानी और उनके वंशज शाह शुजा दुर्रानी जिन्होंने सिक्ख समुदाय के संस्थापक राजा रंजीत सिंह को यह हीरा सौंप दिया था।
  • राजा रंजीत सिंह ने अपनी वसीयत में कोहिनूर हीरे को उनकी मृत्यु के बाद जगन्नाथपूरी (उड़ीसा, भारत) के मंदिर में देने की बात कही, परंतु ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) ने उनकी वसीयत नहीं मानी।
  • 29 मार्च 1849 को द्वितीय एंग्लो – सिक्ख युद्ध की संपति पर ब्रिटीश फोर्स ने राजा रंजीत सिंह को हरा दिया तथा कोहिनूर को ब्रिटिश (इंग्लैंड) की महारानी विक्टोरिया को सौंपने की ठानी। कोहिनूर को फिर जहाजी यात्रा से ब्रिटेन लाया गया और इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के अधीन सौंप दिया गया।

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महारानी ने कटवाया था कोहिनूर!!

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इसे Crystal Palace में प्रदर्शिनी के लिए रखा गया था जिस समय इसका कुल वजन 186 केरेट था। लोगों को तथा महारानी विक्टोरिया के पति Prince Albert को हीरे की कम चमक देख कर काफ़ी निराशा हुई। इस पर महारानी ने इसे एक नए रूप में ढालने का सोचा।
महारानी के इस निर्णय के तहत, 1852 में डच के एक जौहरी मिस्टर केंटर को इसे काटने को कहा गया। उन्होंने इसे काट कर 105.6 केरेट का कर दिया। इसे काट कर ओवल शेप में 3.6cm x 3.2cm x 1.3cm की साइज़ का बना दिया गया। आपको बता दें की इससे पहले इसे कभी नहीं काटा गया।

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आज भी कायम है बवाल!

  • कोहिनूर पर कई देश अपना हक बताते हैं। भारत कहता है कि यह भारत की सम्पदा है, जिसे ब्रिटीशों ने गलत तरीके से लूट लिया, वहीं ब्रिटिश सरकार कहती है कि कोहिनूर को रंजीत सिंह ने लाहोर शांति संधि के दौरान  ब्रिटीशों को तोहफे में दिया था।
  • भारत की आजादी के बाद, 1947 से ही भारत ने इसे वापस लाने की काफ़ी कोशिशें की। 1953 में महारानी एलीज़ाबेथ द्वितीय के राजतिलक दौरान भी भारत द्वारा इसकी मांग की गई थी। लेकिन हर बार ब्रिटिश सरकार कोहिनूर पर ब्रिटिश हक़ बताकर भारत की सभी दलील ख़ारिज कर देती है। इस लदाई में पाकिस्तान भी शामिल है।
  • 1976 में पाकिस्तान ने कोहिनूर पर अपना हक़ बताते हुए ब्रिटिश सरकार से कोहिनूर, पाकिस्तान को लौटाने की बात कही। इसके जवाब में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री जेम्स केलेघन ने तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ज़ुल्फिकार अली भुट्टो को खत लिखा की “कोहिनूर को 1849 में लाहोर की शांति संधि के तहत महाराजा रंजीत सिंह ने ब्रिटिश सरकार को दिया है।और इसलिए ब्रिटिश महारानी कोहिनूर को पाकिस्तान को नहीं सौंप सकती।
  • हाल ही अप्रैल 2016 में भारत ने ब्रिटेन पर कोहिनूर लौटने की याचिका दायर की गई। सूप्रीम कोर्ट में कोहिनूर पर याचिका के दौरान भारतीय वकील ने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने रंजीत सिंह से जबरदस्ती कोहिनूर नहीं छिना है, बल्कि रंजीत सिंह ने स्वेच्छा से युद्ध के मुआवज़े के तौर पर ब्रिटिश सरकार को कोहिनूर भेंट किया था।

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