बढ़ सकती हैं य़ोगी सरकार की मुश्किलें, हाईकोर्ट ने पूछा राजा भैया के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस क्यों लिए?

उत्तरप्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में दोहरे रवैये को लेकर फंसती नजर आ रही है. एक तरफ तो सरकार अपराधियों से निपटने के लिए  सख्त अभियान की पक्षधर लग रही है जिसमें अपराधियों का धड़ल्ले से एनकाउंटर किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया जैसे बाहूबली विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमें सरकार वापस ले रही है. इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकार से पूछा है कि क्या सरकार के इशारे पर राजा भैया जैसे अपराधियों के खिलाफ दर्ज मुकदमें वापस लिए गए हैं. कोर्ट ने कहा है कि अगर इस मामले में सरकार से संतोषजनक जवाब नही आया तो वह खुद ही संज्ञान लेकर मामले का परीक्षण करेगा. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया मामले को लेकर योगी सरकार घिरी

सीएम योगी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार पर इलाहाबाद खंडपीठ की लखनऊ बेंच ने सवाल उठायें हैं. हाईकोर्ट ने पूछा है कि किया बाहूबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमें सरकार ने वापस लिए हैं? कोर्ट ने सरकार को जवाब देने को कहा है साथ ही यह भी कहा है कि अगर संतोषजनक जवाब नही मिला तो मामले का संज्ञान लेकर खुद ही परीक्षण किया जायेगा.

हाईकोर्ट के इस सवाल के बाद योगी सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं. दरअसल जब से योगी सरकार आई है तब से उत्तरप्रदेश में अपराधियों का धड़ाधड़ एनकाउंटर हो रहा है. उनको कोई रियायत नही देने के सख्त आदेश हैं. लोगों को सरकार की अपराधियों के खिलाफ यह कार्रवाई रास भी आ रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार अब तक करीब 130 अपराधियों का एनकाउंटर हो चुका है. हालांकि उत्तरप्रदेश की सरकार खुद ही दोहरे मानदंड के काऱण घिरने की कगार पर है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच  ने योगी सरकार से पूछा है कि बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ दर्ज दर्जनों अपराधिक मुकदमें वापस क्यों लिए गए?

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया

शिवप्रकाश मिश्र सेनानी की याचिका पर सुनवाई

जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी औऱ जस्टिस मनीष कुमार की बेंच याचिकाकर्ता शिव प्रकाश मिश्र सेनानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही. याचिकाकर्ता के वकील एसएन सिंह रैकवार ने बताया कि शिव प्रकाश मिश्र राजा भैया के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और याची को सुरक्षा मिली हुई थी जिसकी अवधि अब खत्म हो रही है लेकिन इसे जारी ऱखने के प्रत्यावेदन को लेकर सरकार ने अब तक कोई निर्णय नही लिया है.

याचिका मे सुरक्षा के अलावा राजा भैया के खिलाफ वापस लिए गए मुकदमों का मुद्दा भी उठाया गय़ा. जिसके जवाब में बेंच ने कहा कि सरकारी अधिकारी सक्षम अधिकारियों से निर्देश प्राप्त कर बतायें कि निर्धारित अवधि में याची के प्रत्यावेदन पर निर्णय क्यों नही लिया गया है.

याची के अधिवक्ता एसएऩ सिंह रैकवार ने कहा कि याचिकाकर्ता को जान का खतरा बना हुआ है उधर सरकार  जान की सुऱक्षा से संबंधित प्रत्यावेदन का निराकरण ही नही कर रही है. अधिवक्ता के अनुसार एक ओऱ सरकार प्रत्यावेदन का निस्तारण नही कर रही है तो वहीं दूसरी ओर निर्दलीय विधायक राजा भैया के रसूख को चलते उनके खिलाफ चल रहे अपराधिक मुकदमें वापस ले रही है.

याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उत्तरप्रदेश सरकार से पूछा है कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ दर्ज मुकदमा क्यों वापस लिया? सरकार जवाब दे. यही नही कोर्ट ने कहा है कि अगर जवाब संतोषजनक नही रहा तो वह खुद ही संज्ञान लेगा