रेप पीड़ित ने कहा कि अब नही लड़ना है केस तो गुस्से में आ गये जज साहब, सूना दी ये सजा

भारत में रेप मामले को बेहद गंभीर अपराध वाली श्रेणी में रखा जाता है. ऐसे केस में आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाता है और फिर बेल मिल पाना लगभग नामुमकिन होता है. ऐसे में अगर रेप पीड़िताओं को इन्साफ दिलाने के लिए बनाये क़ानून का मजाक अगर कोई महिला ही उड़ाए तो जज साहब को गुस्सा आना लाजमी है.

महिला ने कहा- अब नही लडूंगी रेप का केस, कोर्ट ने ठोका जुर्माना 

दरअसल ये पूरा मामला बम्बई हाईकोर्ट से जुड़ा हुआ है. दरअसल बम्बई हाईकोर्ट में एक मामला चल रहा था जिसमें एक महिला ने एक पुरुष पर रेप का आरोप लगाया था. सुनवाई चल रही थी इसी बीच महिला ने एक याचिका दायर कहा कि वह इस मामले को आगे नहीं ले जाना चाहती. जब ये मामला जज के सामने पहुंचा तो जस्टिस आरडी धानुका एवं जस्टिस वीजी बिष्ट की बेंच ने मंगलवार को महिला को महाराष्ट्र पुलिस कल्याण कोष में चार सप्ताह के भीतर 25 हजार रुपए जमा कराने के निर्देश दिए. बेंच ने कहा कि अगर जुर्माना नहीं भरा गया तो पुरुष के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज करने का उसका आदेश वापस हो जाएगा.

परिवार के दबाव में दर्ज कराया था केस-महिला 

वहीँ महिला की याचिका का विरोध करते हुए सरकार वकील ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और इस पर आरोपपत्र दाखिल करेगीं. उन्होंने कहा कि अगर अदालत FIR रद्द करना चाहती है तो महिला पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए. अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा,‘‘हमारे विचार से याचिकाकर्ता का मामला सिर्फ इस पर स्वीकार नहीं किया जा सकता कि उसने परिवार के सदस्यों के दबाव में आकर शिकायत दर्ज कराई थी.’‘ कोर्ट ने कहा,‘‘ अब चूंकि याचिकाकर्ता शिकायत को आगे नहीं ले जाना चाहती है तो हम FIR को रद्द करते हैं लेकिन इस शर्त पर कि याचिकाकर्ता महाराष्ट्र पुलिस कल्याण कोष में चार सप्ताह के भीतर 25,000 रुपए जमा कराए.”

दरअसल मुम्बई के पालघर के नालासोपारा में रहने वाली एक महिला ने अपने के पुरुष साथी पर केस दर्ज करवाया था. इसके बाद उनसे अदालत में याचिक दायर कर केस रद्द करने की मांग की. उसने कहा कि परिवार के दबाव में उसनये केस दर्ज करवाया था. इसके बाद अदालत ने महिला पर 25 हजार रूपये का जुर्माना लगा दिया.
वैसे क़ानून का दुरूपयोग करना एक बेहद संगीन अपराध माना जाता है.