हाथरस में पीड़िता के गांव को पुलिस ने पूरी तरह से किया सील, किसी के आने-जाने पर पांबदी !

हाथरस की सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता की मौत के बाद जारी राजनीतिक हंगामा बढ़ता ही जा रहा है. पुलिस प्रशासन द्वारा 19 वर्षीय युवती की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार किए जाने के बाद पूरे देश में गुस्सा है. लोग दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे हैं. इस बीच पीड़िता के गांव को पूरी तरह से सील कर दिया गया है और किसी के भी आने-जाने पर रोक लगा दी गई है. चारों ओर पुलिस का पहरा लगा हुआ है. यहां तक की मीडिया कर्मियों को भी अंदर नही जाने दिया जा रहा है.

हाथरस पीड़िता
Photo- opoyi.com

पुलिस प्रशासन का सख्त पहरा

हाथरस पीड़िता के मामले का विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा राजनीतिकरण किए जाने के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने पूरे गांव को सील कर दिया है. गांव को पूरी तरह से छावनी में बदल दिया गया है. हालांकि मीडिया को गांव में एंट्री नही दिए जाने की बात किसी को पच नही रही है. पुलिस ने गांव के घरों में ताला लगा दिया है. उधर मृतक पीड़िता के चचेरे भाई का आरोप है कि डीएम प्रवीण कुमार ने घर के सभी लोगों का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया है.

टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन की पुलिस से धक्का-मुक्की

पीड़िता के परिजनों से मिलने आ रहे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को पुलिस ने रोक दिया. इस बीच सांसद डेरेक ओर ब्रायन की पुलिस की धक्का-मुक्की भी हुई जिसके दौरान वह जमीन पर गिर पड़े. घटना के बाद टीएमसी सांसद धरने पर बैठ गए. टीएमसी नेता ममता ठाकुर ने कहा – हम उसके परिवार से मिलने जा रहे थे, लेकिन हमें अनुमति नही मिली. जब हमने जोर दिया तो महिला पुलिसकर्मियों ने हमारे ब्लाउज को खींचा और हमारी सांसद प्रतिमा पर लाठी चार्ज किया. बता दें कि राहुल गांधी भी गुरुवार को पुलिस के साथ धक्का-मुक्की के बाद जमीन पर गिर पड़े थे.

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उधर हाथरस की घटना पर एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा- मुझे लगता है कि यूपी सरकार कुछ छिपाना चाहती है. डीएम और अन्य लोगों के इस तरह के बयान से साबित होता है योगी सरकार कुछ छिपा रही है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी हाथरस की घटना को दर्दनाक बताया है. उन्होंने कहा हम लोकतंत्र में रह रहे हैं औऱ सत्ता में बैठे लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे इस देश के मालिक नही बल्कि सेवक हैं.