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सचिन पायलट के समर्थन में आया गुर्जर समाज, उठाने जा रहा है ऐसा कदम कि उड़ सकती है कांग्रेस की नींद

राजस्थान के सियासी संग्राम में मौजूदा हालात में अशोक गहलोत खेमा अभी भले ही राहत की सांस ले रहा हो, लेकिन सचिन पायलट ने भी कांग्रेस आलाकमान की नाक में दम करने की ठान रखी है। उप मुख्यमंत्री और प्रदेश के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद से सचिन पायलट चुप नहीं बैठे हैं और ना ही वो आसानी से चुप बैठ सकते हैं। सचिन पायलट ऐसे पिता के बेटे हैं, जो गुर्जर समाज पर राज करते थे। जी हां, सचिन पायलट के पिता और कांग्रेसी नेता राजेश पायलट का गुर्जर समाज और उनके वोटों पर बोलबाला था। यही वजह थी कि कांग्रेस आलाकमान उनकी नाराजगी को हल्के में नहीं लेता था।

sachin pilot

फिलहाल अब सचिन पायलट के समर्थन में तीन राज्यों के गुर्जर दिल्ली से सटे गुरुग्राम में पंचायत करने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस पंचायत में सचिन पायलट को समर्थन करने पर बात की जाएगी। बता दें कि गुरुग्राम के रीठौज गांव में ये पंचायत 26 जुलाई को आयोजित की जाएगी। इसमें हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के गुर्जर समाज के लोग शामिल होंगे, जिसमें सचिन पायलट के समर्थन की बात की जाएग। अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस की नींद उड़नी तय है। क्योंकि एक तो वैसे ही कांग्रेस के सितारे गर्दिश में चल रहे हैं, वहीं गुर्जर समाज का भी कांग्रेस से अलग होना, पार्टी के लिए काफी नुकसान दायक होगा।

बता दें कि गुर्जर समाज में सचिन पायलट का काफी दबदबा है, उनके पिता राजेश पायलट भी बड़े गुर्जर नेता रहे हैं। ऐसे में अब जब सचिन पायलट अपने राज्य में संकट में हैं और उन्हें इस तरह साइडलाइन किया जा रहा है, एक बार फिर गुर्जर समाज सचिन पायलट के पक्ष में खड़ा है। हालांकि, कोरोना संकट के बीच भीड़ ना इकट्ठा करने का नियम अभी भी लागू है। ऐसे में इस पंचायत के लिए इजाजत किस तरह मिलती है और कितने लोग शामिल होते हैं, इसपर भी नजरें बनी रहेंगी।

बता दें कि जब कांग्रेस के सामने सचिन पायलट अपनी तीन मांगों के साथ पार्टी आलाकमान के सामने अपना विरोध लेकर खड़े हुए थे तो पार्टी की तरफ से सचिन पायलट के युवा जोश के आगे अशोक गहलोत के अनुभव पर विश्वास जताया गया और पायलट की मांगों को अनसुना कर दिया गया। इन मांगों में अशोक गहलोत को मुख्यंमत्री पद से हटाना भी शामिल था। लेकिन कांग्रेस की तरफ से इसे नहीं माना गया। उल्टा पायलट को ही उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया। इसके बाद राजस्थान में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। क्योंकि 2018 में जब सचिन पायलट की जगह अशोक गहलोत सीएम बन गए थे, तब सचिन समर्थकों ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया था। ऐसे में इस बार भी सरकार अलर्ट पर थी।

सचिन पायलट

गहलोत और पायलट में तकरार की एक वजह ये भी है कि, दोनों ही राजस्थान में अलग-अलग समुदाय से आते हैं, जिनकी एक-दूसरे से कम ही बनती है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच की ये तल्खी भी अब जमीनी स्तर तक दिख रही है। गौरतलब है कि अब अलग-अलग मोर्चों पर ये लड़ाई लड़ी जा रही है। एक ओर अदालत का रास्ता अपनाया गया, तो दूसरी ओर राजनीतिक दांव-पेच जारी है और अब जनता का समर्थन खुले तौर पर लिया जा रहा है।