फल फूल रहा ‘शिक्षा का गुजरात मॉडल’, प्राइवेट स्कूलों को पछाड़कर सूरत के सरकारी स्कूलों में एडमिशन के लिए मारामारी

गुजरात का नाम जुबान पर आते ही एक ख्याल लोगों के मन में आता है ‘उन्नत्ति’ या विकास। विकास का गुजरात मॉडल हर जगह चर्चा में रहता है। गुजरात का एक और मॉडल सुर्ख़ियों में है और इस मॉडल का जमीन पर विगत वर्षों से प्रभाव भी दिख रहा है। यह मॉडल है शिक्षा का गुजरात मॉडल। जिसके अंतर्गत सूरत के सरकारी स्कूलों में पिछले तीन साल से एडमिशन लेने के लिए भारी भीड़ देखी जा रही है। इस मॉडल के परिणाम स्वरुप गुजरात में पिछल 7 वर्षों में निजी स्कूलों के 3.3 लाख छात्र सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए है।

गौरतलब है कि इन स्कूलों का संचालन सूरत नगर निगम करती है। इस वर्ष इन स्कूलों में उपलब्ध सीटों से तीन गुना ज्यादा आवेदन पत्र आए हैं। इसके पीछे का कारण सूरत के सरकारी स्कूलों ने आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करने में प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ दिया है।

पुरे देश में आमतौर पर देखा जाता है कि माता-पिता अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजने से बचते हैं और प्राइवेट स्कूलों की ओर दौड़ते रहते हैं। लेकिन, सूरत का सरकारी स्कूल नंबर 354 पिछले तीन सालों से बेहतर शिक्षा और व्यवस्था के कारण प्राइवेट स्कूलों के छात्रों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। अपने बच्चों के इस स्कुल में एडमिशन के लिए माता पिता अत्यंत आतुर हैं। एक ही भवन में चल रहे दो शिफ्ट के इस सरकारी स्कूल में कुल 1400 छात्र हैं। लेकिन इस बार 4042 से अधिक छात्रों ने एडमिशन के लिए आवेदन किया है। जानकारी मिली है कि इन्हें लकी ड्रॉ के जरिए एडमिशन दिया जाएगा।

यही हालात सूरत के पालनपुर स्थित सरकारी स्कूल नंबर 318 में है। यहाँ पर एक बोर्ड लगा है कि प्रवेश केवल किंडरगार्टन के साथ-साथ कक्षा 1, 4 और 5 में दिया जाएगा। हालाँकि, कुछ ही दिनों में स्कूल की सारी सीटें भर गई और अभी भी 83 बच्चे प्रतीक्षा सूची में हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ स्कूल लोगों से अपने बच्चों के एडमिशन के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए कह रहे हैं। सरकारी स्कूलों में नंबर 334, 346, और 355 में 1000-1100 सीट है, लेकिन अभी तक इन स्कूलों में एडमिशन के लिए लगभग 4200 आवेदन आए हैं। अब बच्चों को लकी ड्रॉ के माध्यम से एडमिशन दिया जाएगा और बाकी बच्चों को अगले साल फिर से आवेदन करने के लिए कहा जाएगा। इन स्कूलों की खास बात यह है की इनमें कुछ अध्यापकों के बच्चे भी पढ़ते हैं।

मोटा वराछा क्षेत्र में भारी माँग के चलते गुजराती मीडियम का स्कूल बनाया गया है। स्कूल में 720 सीटों की क्षमता है, जबकि एडमिशन के लिए 3000 फॉर्म आए हैं। इसी कैंपस में अंग्रेजी मीडियम स्कूल के लिए 1000 फॉर्म आए हैं, जबकि इसकी क्षमता 225 सीटों की है। अब यहाँ भी बच्चों को लकी ड्रॉ के जरिए प्रवेश दिया जाएगा।

ऑनलाइन एडमिशन की प्रभारी रमाबेन ने बताया,”समिति के स्कूल में प्रज्ञा प्रोजेक्ट चल रहा है। इसके अलावा निगम के स्कूल में छात्रों को बिना बोझ के पढ़ाई कराई जाती है। इसलिए छात्रों का मानसिक विकास भी बहुत अच्छा होता है। इसके अलावा निगम के शिक्षक मन लगाकर छात्रों को पढ़ाई करा रहे हैं और शिक्षा समिति को अपडेट किया जा रहा है।”

इस तरह के घटनाक्रमों से साफ़ दिख रहा है कि शिक्षा का गुजरात मॉडल फल फूल रहा है और सूरत के सरकारी स्कूल सुविधाओं और शिक्षा के मामले में स्थानीय प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ रहे हैं।