सरकार के लॉकडाउन की नाकामी,अब सजा भुगत रहा है देश?

कोरोना महामारी ने अब तक पूरे विश्व को चपेट में ले लिया है. किसी को अदांजा नही था चीन के शहर वुहान से निकला यह वायरस इंसान के लिए कहर बन कर टूटेगा. इस वायरस ने वैश्विक स्तर पर अब तक 1 करोड़ 38 लाख लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है. प्रधानमंत्री मोदी ने 24 मार्च को जब पहले लॉकडाउन की घोषणा की थी तब किसी ने सोचा नही था कि यह महामारी इतना भयानक रुप में सामने आयेगी. अमेरिका जैसे देश इस महामारी से तबाह हो गए भारत की भी स्थिति दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है. तो क्या भारत में लॉकडाउन नाकाम रहा है और इसकी सजा देशवासियों को भुगतनी पड़ रही है. आइए जानते हैं.

क्या लॉकडाउन में सरकार नाकाम रही है

24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने पहले 21 के दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी तब किसी ने नही सोचा था कि कोरोना वायरस इस तरह से लोगों के लिए खतरा बन जायेगा. लॉकडाउन सहित सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर और मास्क के उपयोग को लेकर तरह-तरह की बाते की गई लेकिन क्या वास्तव में सरकार के लॉकडाउन का कोई फायदा हुआ है. दरअसल इसका जवाब पीएम मोदी के भाषण में ही छुपा हुआ है. उन्होंने 24 मार्च को कहा था- “आने वाले 21 दिन हर एक नागरिक और हर परिवार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो कोरोना वायरस का साइकिल तोड़ने के लिए 21 दिन का समय बहुत अहम है. अगर ये 21 दिन नहीं संभले तो देश औऱ आपका परिवार 21 साल पीछे चला गया.’’

जो आशंका प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त की गई वही हुआ कोरोना का साइकिल नही टूटा और यह अब इस तेजी से आगे बढ़ रहा है कि भारत कोरोना से संक्रमित बड़े-बड़े देशों को पीछे छोड़ रहा है.

24 मार्च से अब तक देश के कई हिस्सों में लॉकडाउन रहा. कई जगहों पर लॉकडाउन होने के बावजूद लोगों द्वारा सावधानी नही बरती गई, लोग सड़कों पर बिना मास्क की ही उतर आए. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नही किया गया. शायद यही कारण रहा कि कोरोना वायरस का साइकल कई चरणों में लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी नही टूटा. बार-बार लॉकडाउन लगाने, बढ़ाने या फिर उसे सख्त करने से ही लग रहा है कि संक्रमण का साइकल टूट नही रहा है औऱ स्थिति नियंत्रण से बाहर है.

ल़ॉकडाउन से ऊबे लोग

यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि कोरोना महामारी भले ही कितनी ही खतरनाक क्यों न हो लोग सरकार के लॉकडाउन से ही ऊब गए. लॉकडाउन-1,2,3,4 और फिर अनलॉक-1; इतने सारे लॉकडाउन से लोगो ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना छोड़ दिया, मास्क या सैनिटाइजर की तो बात ही दूर है. और अब फिर लॉकडाउन की चर्चा हो रही है. इतने सारे लॉकाडाउन को याद करना लोगों को मुश्किल हो गया और स्थिति बिगड़ती चली गई.

स्थिति और बदतर होने वाली है

जानकारो की मानें तो आने वाले समय में स्थिति बद से बदतर होने वाली है. इसका मुख्य कारण स्वास्थ्य क्षेत्र की कमजोर जड़े मानी जा रही है. भारत के दूर-दराज के इलाकों में पहुंचे लोग न तो जागरुक हैं और न ही वहां तक उचित इलाज की व्यवस्था है. इसके अलावा बड़े शहरो की बात करें तो स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अभी भी लोगों में संशय है. लोगों को लगता है कि कोरोना हुआ इसका मतलब बचने की आशा न के बराबर है.

देश में कोरोना की भयावह स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 24 मार्च को जब प्रधानमंत्री ने पहले लॉकडाउन की घोषणा की थी तब संक्रमित मरीजों की संख्या 560 थी जिसमें से 10 लोगों की मौत हुई थी. लेकिन 16 जुलाई को यही संख्या 1,004,650 हो गई है. इसमें से 25602 लोगों की मौत हो चुकी है. मतलब 24 मार्च की तुलना में अब यह संख्या 1800 गुना तक बढ़ गई है.

आगे की रणनीति

कोरोना वायरस को देशवासी लगभग 5 महीने से छेल रहे हैं. इस दौरान हुए कई लॉकडाउन से लोग ऊब चुके हैं. सरकार भी लॉकडाउन को बढ़ाना नही चाहती लेकिन जिस तरह से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है उससे लॉकडाउन लगाना सरकार की मजबूरी हो गई है.

इससे एक बड़े तबके के लिए रोजी-रोटी का सवाल पैदा हो गया है. भारत मे अभी भी करोड़ों लोग रोजाना की कमाई पर जिंदा रहते हैं. यह लोग जल्द से जल्द अपनी सामान्य जिंदगी की ओर लौटना चाहते हैं लेकिन सरकार के लिए असमंजस की स्थिति अभी भी बरकरार है. इस समय की स्थिति को लेकर कहें तो सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की जरुरत है. साथ ही कोरोना से होने वाले संक्रमण को दूर करने की लिए जरुरी उपाय अपनाने की सख्त जरुरत है.