एमनेस्टी यूके ने ‘राष्ट्र-विरोधी’ गतिविधियों के लिए भारतीय इकाई को अवैध रूप से 51 करोड़ रुपये से अधिक भेजे: ईडी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, एमनेस्टी इंटरनेशनल यूके ने अवैध रूप से अपनी भारतीय इकाई को “राष्ट्र विरोधी गतिविधियों” के लिए 51 करोड़ रुपये से अधिक भेजे। ईडी ने तथाकथित एनजीओ पर अपनी अभियोजन शिकायत में आरोप लगाया है, जो नई दिल्ली की एक विशेष अदालत में आरोप पत्र के बराबर है। ईडी ने शिकायत में एमनेस्टी इंडिया के ‘कश्मीर: एक्सेस टू जस्टिस’ और ‘जस्टिस फॉर 1984 सिख नरसंहार’ नाम की दो परियोजनाओं को चिह्नित किया था।

केंद्रीय एजेंसी के मुताबिक, सर्विस एक्सपोर्ट के बहाने यह अंजाम दिया गया।

यह घटनाक्रम ईडी द्वारा एमनेस्टी इंडिया और उसके पूर्व सीईओ आकार पटेल और कुछ अन्य संस्थाओं के खिलाफ 9 जुलाई को मनी-लॉन्ड्रिंग चार्जशीट दायर करने के बाद आया है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एआईआईपीएल), इंडियंस फॉर एमनेस्टी इंटरनेशनल ट्रस्ट (आईएआईटी), और अन्य पक्ष बेंगलुरु में प्रिंसिपल सिटी सिविल एंड सेशंस जज के सामने लाए गए अभियोजन मामले के विषय थे।

ईडी की शिकायत के अनुसार, एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट (एआईआईएफटी) को 2011-2012 के वित्तीय वर्ष के दौरान एमनेस्टी इंटरनेशनल, यूके से विदेशी दान प्राप्त करने के लिए एफसीआरए, 2010 के तहत प्राधिकरण प्राप्त हुआ।

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के नागरिक कानून के तहत पहले, 8 जुलाई को, जिसमें क्रमशः एआईआईपीएल और पटेल को कुल मिलाकर 51.72 करोड़ और 10 करोड़ रूपए को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। पटेल ने कहा है कि वे फेमा के अनुसार की गई ईडी की कार्रवाई को अदालत में आगे बढ़ाएंगे।