दिल्ली का आईजीआई हवाई अड्डा बना पूरी तरह से हाइड्रो और सौर ऊर्जा पर काम करने वाला भारत का पहला हवाई अड्डा

दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (आईजीआई) इस महीने पूरी तरह से पनबिजली (हाइड्रो) और सौर ऊर्जा से चलने वाला देश का पहला हवाई अड्डा बन गया है। 2015 में, केरल में कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर चलने वाला देश का पहला हवाई अड्डा बना था।

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने कहा कि अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए नवीकरणीय स्रोतों पर स्विच करने से उसे परोक्ष रूप से 200,000 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी।

स्विचिंग 1 जून से शुरू हो गई है, और हवाई अड्डे की बिजली की जरूरतों का लगभग 6 प्रतिशत ऑन-साइट सौर ऊर्जा संयंत्रों द्वारा पूरा किया जा रहा है, जबकि अन्य 94 प्रतिशत ऊर्जा जल विद्युत संयंत्रों से आती है।

डायल ने कहा, “यह एक अच्छा कदम है, जो सीधे दिल्ली हवाई अड्डे को हर साल 200,000 टन कारण डाई ऑक्साइड के अप्रत्यक्ष उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा। डायल ने 2036 तक हवाई अड्डे के लिए पनबिजली की आपूर्ति के लिए हिमाचल प्रदेश की एक पनबिजली उत्पादक कंपनी के साथ एक दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

डायल के सीईओ विदेह कुमार जयपुरियार ने कहा है कि, डायल का निर्णय बहुत फायदेमंद रहा है, क्योंकि डायल पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में अथक प्रयास कर रहा है और 2050 के वैश्विक लक्ष्य की तुलना में वर्ष 2030 तक दिल्ली हवाई अड्डे को शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन हवाई अड्डा बनाने का लक्ष्य रखा है।”

विदेह ने कहा,”दिल्ली का आईजीआई हवाई अड्डा लंबे समय से सौर ऊर्जा का उपयोग कर रहा है, लेकिन यह सभी बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं था, हालांकि जल विद्युत संयंत्रों की मदद से अब आईजीआई एक जल विद्युत संयंत्र से अपनी प्रमुख बिजली की जरूरतों को पूरा कर रहा है। ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों पर हवाई अड्डे को पूरी तरह से चलाना वास्तव में डायल द्वारा हासिल किया गया एक प्रमुख मील का पत्थर है। ”