तीन भारतीय कंपनियाँ जुटी कोरोना वैक्‍सीन बनाने की जंग में, अब ऐंटीबॉडीज से भी होगा इलाज

एक रिसर्च के मुताबिक ऐंटीबॉडीज भी वैक्‍सीन की तरह ही होती हैं लेकिन उनसे कम समय के लिए ही इम्‍युनिटी मिलती है। भारत की लगभग तीन कंपनियाँ कोविड-19 के लिए ऐंटीबॉडीज दवाएं बनाने की प्रक्रिया में जुट गयी हैं। कोरोना संक्रमित व्‍यक्ति के शरीर में इन दवाओं के ज़रिये ऐंटीबॉडीज डिलिवर की जाएंगी। भारत सीरम्‍स, इन्‍टास फार्मा और बायोलॉजिकल ई ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के साथ मिलकर इस पर काम शुरू किया है। ऐंटीबॉडीज शरीर में फर्स्‍ट लाइन ऑफ डिफेंस की तरह काम करती हैं और जैसे ही कोई वायरस पैथोजेन हमला करता है, इम्‍युन सिस्‍टम ऐंटीबॉडीज बनाने लगता है। फिलहाल जो दवाएं कोरोना के इलाज में यूज हो रही हैं, वे मरीजों में केवल वायरल काउंट कम करती हैं।

अहमदाबाद में इन्‍टास की एक योजना के मुताबिक ऐंटीबॉडीज उन मरीज़ों के खून से निकाली जाएँगी जो ठीक हो चुके हैं। कंपनी का टार्गेट ऐसी दवा बनाने का है जो सभी ब्लड ग्रुप के मरीज़ों को दिया जा सके। कुछ मॉडरेट मरीजों पर ट्रायल करने के बाद अब रिजल्‍ट्स का इंतेज़ार किया जा रहा है। मुंबई की भारत सीरम्‍स घोड़ों के ऐंटीसेरा का इस्‍तेमाल कर ऐंटीबॉडीज बनाएगी। यह तरीका रेबीसज और डिप्‍थीरिया की वैक्‍सीन बनाने में भी यूज़ होता है। यह उम्मीद लगायी जा रही है की अगले महीने तक रिजल्‍ट्स आएँगे।