क्या बिहार विधानसभा चुनाव में लालू यादव की चुनावी गाड़ी फंसती दिख रही है?

चारा घोटाले मामले में झारखंड के रांची जेल में बंद लालू यादव की चुनावी गाड़ी इस बार के विधानसभा चुनाव में फंसती दिख रही है. उनके दोनों बेटे भले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बिहार की समस्याओं को लेकर हमलावर हों लेकिन जिस तरह से वह चुनावी सीट को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं उससे यही लगता है कि आने वाला समय आरजेडी के लिए अच्छा नही है. यही नही आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन में भी सीटों को लेकर जमकर खींचतान मची हुई है. महागठबंधन में शामिल दल ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं लेकिन उनके बीच सहमति नही बन पा रही है.

बिहार चुनाव
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बिहार चुनाव में RJD  की स्थिति डावांडोल

आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप अपने लिए सुरक्षित सीट ढूंढ़ने में लगे हुए हैं. वह महुआ विधानसभा क्षेत्र को छोड़ कर हसनपुर सीट से लड़ने की तैयारी में हैं. इसके मद्देनजर उन्होंने सोमवार को हसनपुर मे रोड शो भी किया. तेजप्रताप यादव की पत्नी उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी मे हैं इसको लेकर वह लगातार दुविधा मे हैं. एक दिन पहले ही तेज प्रताप के ससुर और अब जनता दल यूनाइटेड मे शामिल हो चुके चंद्रिका राय ने उन पर निशाना साधते हुए कहा था कि तेज प्रताप भगोड़े हैं. वह महुआ से भागकर कहीं भी जाए चुनाव नही जीत सकते. उन्होंने आरोप लगाया कि लालू यादव के परिवार ने यादवों का इस्तेमाल पैसे और पॉवर के लिए किया लेकिन अब लोग जागरुक हो चुके हैं और उनके बहकावे मे आने वाले नही हैं.

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तेजस्वी भी खतरा महसूस कर रहे हैं

बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव भी राघोपुर सीट से डरे हुए हैं. हालांकि यह सीट उनकी पुश्तैनी सीट रही है. 2000 औऱ 2010 के चुनाव को छोड़ दें तो 1995 से यह सीट लालू यादव की पार्टी के कब्जे में रही है. 2015 में तेजस्वी यादव ने यहां से सियासी पारी का आगाज किया था. हालांकि अब वह भी इस सीट पर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं.

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महागठबंधन में सब कुछ ठीक नही

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के मुकाबले महागठबंधन की चुनावी तैयारियां डावांडोल ही लग रही हैं. महागठबंधन की मुख्य पार्टी आरजेडी 160 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है. तो वहीं कांग्रेस ने 90 से ज्यादा सीटों की मांग की है. उधर भाकपा-माले करीब 50 सीटों पर चुनाव ल़ड़ना चाहती है ऐसे में यह संख्या बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों से भी ज्यादा हो रही है जो किसी भी स्थिति में संभव नही है. महागठबंधन में इस समय आरजेडी समेत करीब 7 दल हैं. हालांकि इस पर फैसला लालू यादव को लेना है कि कौन  पार्टी कितने सीटों पर चुनान लड़ेगी.

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बिहार विधानसभा में महागठबंधन की स्थिति

महागठबंधन में इस समय आरजेडी समेत करीब 7 दल हैं जिनमें कांग्रेस, आरएलएसपी, वीआईपी औऱ भाकपा-माले प्रमुख हैं. बिहार विधानसभा में आरजेडी के पास 80 विधायक हैं, तो वहीं कांग्रेस के 26 और भाकपा-माले के 3 विधायक हैं. इन सबके बीच बिहार विधानसभा चुनाव में दलों के सीटों को लेकर आपसी झगड़े और आरजेडी की खुद की मुश्किलें भी बिहार विधानसभा चुनाव में उसके हारने का कारण बन सकती हैं.