तो इस वजह से अमेरिका ने चीन के तीन बड़े अधिकारियों पर लगाया प्रतिबंध !

अमेरिका और चीन के बीच लगातार गतिरोध जारी है. अमेरिका ने पहले कोरोना वायरस, उसके बाद भारत के साथ सीमा विवाद और अब चीन में उइगर मुसलमानों की दुर्दशा को लेकर चीन को जबरदस्त तरीके से घेरा हुआ है. उइगर मुसलमानों पर चीन के जुल्म को देखते हुए अमेरिका ने बड़ी कार्रवाई की है. उसने चीन के तीन बड़े अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह अधिकारी चीन के उइगर प्रांत से जुड़े बताए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इनकी शह पर ही चीन के इस प्रांत के मुसलमानों को न केवल बंधक के तौर पर रखा जाता है बल्कि जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर उनकी नसबंदी भी की जाती है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

बता दें कि चीन पर उइगर मुसलमानों सहित अन्य अल्पसंख्य्क समुदाय के लोगों पर अत्याचार को लेकर पहले से ही आरोप लगते रहे हैं.

इन तीन अधिकारियों पर लगाया गया प्रतिबंध

अमेरिका ने चीन के शिनजियांग प्रांत के उइगर मुसलमानों के मानवाधिकार हनन को लेकर बड़ा कदम उठाया है. उसने चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के तीन बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए उन पर प्रतिबंध लगा दिया है. जिन तीन अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया गया है उसमें शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी सचिव चेन क्वांगो, शिनजियांग पॉलिटिकल और लीगल कमेटी के सचिव झू हैलून और शिनजियांग पब्लिक सिक्यूरिटी ब्यूरो के वर्तमान पार्टी सचिव वैंग मिंगशान शामिल हैं. इसके अलावा इनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी अमेरिका आने पर रोक लगा दी गई है.

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा, ”मैं दूसरे सीसीपी अधिकारियों पर भी अतिरिक्त वीजा प्रतिबंध लगा रहा हूं, जो उइगर मुस्लिमों, कजाक और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों पर अन्याय के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं. इस प्रतिबंध के दायरे में परिवार के सदस्य भी आएंगे.”

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पंपियो

कौन हैं उइगर मुसलमान

चीन के पश्चिमी भाग में स्थित शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों की बड़ी आबादी रहती है. यहां करीब 10 लाख उइगर मुसलमान रहते हैं. माना जाता है कि चीन में इस्लाम सातवीं शताब्दी में मध्य-पूर्व देशों के राजदूतों के जरिए पहुंचा. उस समय चीन में तांग साम्राज्य के सम्राट गाओजोंग शासक थे.

चीनी उइगर मुस्लिम

लेकिन अब वर्षों से चीन इनका दमन करने में लगा हुआ है. चीन की तानाशाही और इस जघन्य अत्याचार के खिलाफ कई अंतरराष्ट्रीय मनवाधिकार संगठन आवाज उठा चुके हैं. लेकिन कोई कामयाबी नही मिली बल्कि चीन और तेजी से इनका दमन करने में लगा हुआ है. उन्हें डिटेंशन कैंपों में रखा जाता है, धार्मिक आजादी छीन ली गई है साथ ही अनेकों तरह के प्रतिबंध उन पर लगाए गए हैं.

उइगर मुसलमानों पर चीन का जुल्म

चीन शिनजियांग इलाके मे रह रहे उइगर मुसलमानों पर पिछले कुछ सालों से योजनाबद्ध तरीके से अत्याचार कर रहा है. दरअसल उइगर मुसलमान अपने धर्म, संस्कृति और भाषा को छोड़ना नही चाहते  इसे चीन अपने देश के लिए बड़ी मुश्किल मानता है. यही काऱण है कि वह बड़े पैमाने पर एक अभियान चलाया हुआ, जिसके तहत न सिर्फ उइगर समुदाय के पुरुषों और महिलाओं की जबरदस्ती नसबंदी की  जा रही है बल्कि उन्हें बच्चे पैदा करने से भी रोका जा रहा है. इसका मकसद अगले कुछ सालों में उइगर मुसलमानों की पहचान चीन से हमेशा के लिए खत्म करना माना जा रहा है.

चीन की ऐसी नीति पाकिस्तान जैसे देशों के कारण फल-फूल रही है. एक ओर जहां कथित इस्लामी राष्ट्र पाकिस्ताऩ चीन का चहेता बना हुआ है तो वहीं दूसरी ओर वही चीन अपने यहां स्थित मुस्लिमों पर अत्याचार कर रहा है. यह पाकिस्तान को कहीं से भी दिखाई नही दे रहा है और ना ही इसके खिलाफ उसने कभी आवाज उठाया. इससे साफ झलकता है कि चीन अपनी दोगली चाल पाकिस्तान पर थोपने में कामयाब रहा है. जिसका बड़ा खामियाजा भारत को भुगतना पड़ रहा है. हालांकि अन्य बड़े देशों के मामले में चीन की यह चालबाजी बिखर जाती है.