अजब गाँव की गजब कहानी, अगर तोड़ा नियम तो फोड़ना पड़ेगा नारियल

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नारियल फोड़कर की जाती है है जैसे कि घर में पूजा पाठ, गृह प्रवेश, नई गाड़ी खरीदना, नया व्यवसाय शुरू करना आदि लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि नियम तोड़ने पर नारियल फोड़ा जाए? भले ही यह बात आपको चौंका दे लेकिन यह सच है छत्तीसगढ़ में ऐसा एक गाँव है जहां की पंचायत नारियल का इस्तेमाल नियम तोड़ने वाले लोगों को सुधारने के लिए करती है।

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राजधानी रायपुर से लगभग 110 किलोमीटर दूर राजनांदगांव के अंतर्गत नादिया गांव पड़ता है, जहां अगर कोई भी व्यक्ति कोई भी गलत काम करता है जैसे सट्टा खेलना, ग्राम पंचायत के छोटे-मोटे नियमों को तोड़ना या भाइयों – घर वालों में लड़ाई तो उन्हें पंचायत को एक नारियल का जुर्माना देना पड़ता है । नारियल भगवान के सामने फोड़कर आगे ऐसी गलती नहीं करने की शपथ ली जाती है।

80 साल पहले बना नियम आज भी है जारी

बता दे नारियल फोड़ने की सजा देने की यह परंपरा आज से करीब 80 साल पहले गांव के मुखिया शिवप्रसाद पटेल ने गाँव की सर्वसम्मति से निर्णय लेकर बनाई थी, गाँव के बुजुर्गों का कहना है कि नारियल फोड़ने के साथ साथ उस व्यक्ति को भगवान की शपथ लेनी पढ़ती है कि आगे से वो ये काम नहीं करेगा, जब भी किसी व्यक्ति पर नारियल फोड़ने का जुर्माना लगता है तो उसे सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा होना पड़ता है।

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नारियल फोड़ने की सजा से डर कर सुधर गया पूरा गाँव

गाँव वालों का मानना है कि भले ही नारियल फोड़ने की सजा बड़ी आसान हो लेकिन इसके पीछे उनकी सोच है की आदमी दोबारा ऐसी गलती ना दोहराए और सुधारने का प्रयास करे। इस नियम की वजह से यहां के युवाओं में सुधार नजर आया है। नियमों में रहना हर कोई अपना नैतिक दायित्व समझता है। गांव में अपराध न के बराबर होता है।

लॉकडाउन तोड़ा तो फोड़ना पड़ेगा नारियल

मजेदार बात यह है कि गांव में अगर कोरोना काल में सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन तोड़ता है तो भी उसे नारियल फोड़ना की सजा सुनाई जाती है। फिलहाल गांव में बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं देने, मेहमानों को फिलहाल नहीं बुलाने का फरमान दिया गया है।