तालिबान से भी नहीं डरी अफगानिस्तान की बाज कमांडर बीबी आयशा, कहा सरकार बेकार है!

Afghanistan
Credits BBC News

70 साल की अफगानिस्तान की विद्राेही सरगना बीबी आयशा ने अब 41 साल बाद तालिबान के सामने अपने हथियार डाल दिए। हथियार डालने से कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि तालिबान इस काबिल नहीं कि वो खुद बदल सके या समाज में सुधार ला सके। सरकार बेकार है। अफगानिस्तान की ये जंग शांति में कभी तब्दील नहीं होगी। इस मसले को या तो खुदा सुलझा सकते हैं या फिर ये खूबसूरत क्लाशनिकोव राइफलें।

वे बागलान प्रांत के नाहरिन जिले की हैं और अफगान सरकार से लेकर तालिबान के कमांडरों के बीच ‘बाज कमांडर’ के नाम से जानी जाती हैं। उनका यह नाम हत्या करने की उनकी अदा को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।

बाज की तरह करती थी शिकार!

मानयता है कि वे बाज की तरह अपने शिकार पर घात लगाती थी और अपना काम करते ही फुर्र हो जाती थी। अफगान सरकार के लिए ये चुनौती है कि बाज कमांडर ने अफगान सरकार को छोड़कर तालिबान के साथ सुलह कर ली है।
इससे पता लगाया जा सकता है की अफगानिस्तान सरकार की स्थिति कितनी नाजुक है।

बागलान घाटी से उठा था नाम!

बागलान घाटी में बीबी आयशा के नाम की गूंज 1979 से शुरू हुई थी। उन दिनों रूस की सेना के साथ लड़ाई चल रही थी। इसी के चलते रूसी कमांडो ने उनकी घाटी को घेर लिया था। उस समय आयशा ने अपनी खुद की सेना बनाई थी। घाटी की सुरक्षा के लिए वे रूसी कमांडो से तब तक लड़ती रहीं, जब तक वे हार मानकर उनकी घाटी छोड़कर चले नहीं गए। 1990 के दशक में उन्होंने तालिबान को भी अपनी घाटी में पांव नहीं जमाने दिए थे। बीबी आयशा तालिबान से कभी नहीं डरीं।

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