जेल में सज़ा काटते वक्त भी नहीं छोड़ी पढ़ाई, हासिल की 54 डिग्रियां और एक सरकारी नौकरी, जानिए पूरी कहानी!

जेल में रहकर यदि कोई कैदी अपना फ्यूचर बनाने में जुट जाए तो यह एक आश्चर्य की बात है। अहमदाबाद में कुछ ऐसा ही हुआ। भानूभाई पटेल नामक एक व्यक्ति ने जेल में रहकर सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि 8 साल में 31 डिग्रियां लीं। यह पढ़ाई उनके सज़ा के दौरान की है। उन्हें सरकारी नौकरी का ऑफर भी मिला। नौकरी के बाद 5 सालों में उन्होंने और 23 डिग्रियां ले ली।

Study in jail
Credits Anandabazar

कई रिकॉर्ड्स किए हैं कायम!

बता दें कि उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, यूनिक वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, यूनिवर्सल रिकार्ड फोरम और वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया तक में दर्ज हो चुका है।

FERA कानून के उल्लंघन का लगा था आरोप!

भानूभाई पटेल मूल भावनगर की महुवा तहसील के निवासी हैं। उन्होंने अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री ली। इसके बाद वे 1992 में मेडिकल की डिग्री लेने के लिए अमेरिका चले गए थे। अमेरिका में उनका एक दोस्त स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में जॉब कर रहा था। वह अपनी तनख्वाह भानूभाई के अकाउंट में ट्रांसफर करता था। इसी वजह से उन पर फॉरेन एक्सचेंज रेग्युलेशन एक्ट (FERA) कानून के उल्लंघन का आरोप लगा जिसके चलते उन्हें 50 साल की उम्र में 10 साल की सजा हो गई। फिर उन्हें अहमदाबाद की जेल भेज दिया गया।

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जेल जाने के बाद भी नहीं छूटा सरकारी नौकरी का अवसर!

भानूभाई का कहना है कि जेल से रिहा होने के बाद उन्हें अंबेडकर यूनिवर्सिटी से जॉब का ऑफर मिला। बता दें कि जेल जाने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं मिलती, लेकिन उनकी डिग्रियों के चलते उन्हें सरकारी जॉब का ऑफर भी मिला। नौकरी के बाद 5 सालों में उन्होंने और 23 डिग्रियां लीं। भानूभाई अब तक कुल 54 डिग्रियां ले चुके हैं। यहीं नहीं इस विषय पर उन्होंने गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में तीन किताबें भी लिखी हैं।

अपने जेल के अनुभव तीन किताबों में साझा किए

भानूभाई की गुजराती किताब का नाम ‘जेलना सलिया पाछळ की सिद्धि’ है जबकि अंग्रेजी में उन्होंने ‘BEHIND BARS AND BEYOND’ लिखी है। इतना ही नहीं, भानूभाई 13वीं विधानसभा चुनावों में प्रिसाइडिंग ऑफिसर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इस समय उनकी उम्र 65 साल है और वे अविवाहित हैं।

जेल में शिक्षित कैदियों की संख्या ज्यादा

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक रिपोर्ट बताती है कि, गुजरात की जेल में अनपढ़ों की बजाय शिक्षित कैदियों की संख्या ज्यादा है। इनमें ग्रेजुएट, इंजीनियर, पोस्ट ग्रेजुएट किए हुए कैदी तक शामिल हैं। गुजरात की जेलों में 442 ग्रेजुएट, 150 टेक्निकल डिग्री-डिप्लोमा, 213 पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वहीं, 5179 कैदी 10वीं से कम पढ़े हैं। बता दें कि सबसे ज्यादा आरोपी हत्या और अपहरण के गुनाह में सजा काट रहे हैं।

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कैदियों की पढ़ाई के लिए ओपन यूनिवर्सिटी सहित कई सुविधाएं

गुजरात की जेलों ने कैदियों की पढ़ाई के लिए ओपन यूनिवर्सिटी के साथ कई अभ्यास क्रम भी चलाए हुए हैं। कैदी इनका इस्तेमाल कर आगे की पढ़ाई भी कर रहे हैं। बता दें कि हर साल नियमित रूप से परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं और कैदी इसमें शामिल भी होते हैं।

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