राष्ट्रीय युवा दिवस विशेष – स्वामी विवेकानंद जी के 10 प्रेरक सद्विचार

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युग प्रवर्तक, ओजस्वी विचारक और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती पर पढ़िए स्वामी जी की जन्म जयंती पर उनके 10 प्रेरक विचार –

स्वामी विवेकानंद
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1. उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए।
2. ख़ुद को कमज़ोर समझना सबसे बड़ा पाप है।
3. तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सब कुछ खुद अंदर से सीखना है। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नही है।
4. सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
5. बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप हैं।
6. ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही हैं जो अपनी आंखों पर हांथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।
7. विश्व एक विशाल व्यायामशाला है जहां हम खुद को मज़बूत बनाने के लिए आते हैं।
8. दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।
9. शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु हैं। विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु हैं। प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु हैं।
10. किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आए-आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।

स्वामी विवेकानंद के विचारों से किसी भी व्यक्ति के जीवन मैं आमूलचूल परिवर्तन संभव है जिससे व्यक्ति मानव सामान्य से महामानव बन देश और समाज की सेवा में अपना योगदान दे सकता है।

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